महलपारा बांध के कैचमेंट एरिया और बांध क्षेत्र मे भारी निर्माण, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश की खुली अवहेलना की जा रही

10 वर्ष पूर्व 181 लोगो का था अवैध कब्जा आज अनगिनत ◾
◾कब्जाधारियों में शासकीय कर्मचारी व भू माफियों की संख्या अधिक ◾
◾बांध के कैचमेंट एरिया में हो गए अवैध कब्जे, साथ ही शासकीय भवन भी बने◾
दिलीप गुप्ता
सरायपाली : सरायपाली नगर में एकमात्र बांध जिसे महल बांध के नाम से जाना जाता है का निर्माण सिंचाई व जल ग्रहण के उदेश्य से 1962 में मात्र 2 लाख रुपए की लागत से बनाया गया था । जब तक इस बांध में अतिक्रमण नहीं हुआ था तब तक नगर का जल स्तर भी काफी ऊपर था किंतु जैसे जैसे इस बांध में कब्जे बढ़ते गए वैसे वैसे इस बांध की जल ग्रहण क्षमता कम होते जाने से नगर में भी भूजल का स्तर लगातार नीचे जाने लगा आज स्थिति यह है कि नगर का जलस्तर 600 फिट से नीचे चला गया है । इस स्थिति के कारण नगर मे गर्मी का महीना आते ही पेयजल व निस्तारी की समस्या विकराल हो जाती है ।


स्थानीय प्रशासन , जल संसाधन विभाग व पूर्व ग्राम पंचायत वर्तमान नगरपालिका के निष्क्रियता के चलते 1985 से बांध के अंदर प्रारंभ हुआ अतिक्रमण आज पूरे बांध क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में पहुंच गया है । अतिक्रमण से लगभग आधा बांध अवैध कब्जों व मकानों से पट चुका है । वोट , तुष्टिकरण व संतुष्टीकरण के चलते कोई भी चुने गए पार्षदों , नपाध्यक्षों, विधायकों व सांसदों ने इस अतिक्रमणों को रोकने रुचि नहीं दिखाई उल्टे रोकने की कार्यवाही किए जाने के बजाय अतिक्रमणकारियों के साथ खड़े रहते हुवे उन्हें कब्जा करने के लिए प्रोत्साहित भी करते रहे। इतना ही नहीं वोटो कि राजनीति के चलते चाहे सरकार किसी की भी हो सभी ने विशाल क्षेत्र में कब्जा कर रखे व बड़े बड़े रिहायशी मकान बन चुके इस बांध के अंदर अतिक्रमणकारियो को बिजली , पानी , सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई गई है । इन अतिक्रमणकारियों को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा मिलने वाली सारी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है ।


इस बांध में जरूरतमंदों द्वारा भरी एरिया में कहीं मकान तो कही घेरा बनाकर कब्जा किया गया है इस कार्य में शासकीय कर्मी भी पीछे नहीं है । सर्वे किया जायेगा तो अधिकांश शासकीय कर्मियों ने भी विशाल क्षेत्र में कब्जा कर आलीशान मकान बना लिया गया है । अधिकांश मकानों में चार पहिए गाड़ी खड़ी मिलेगी । यहां तक कि ऐसे लोग गरीबी रेखा कार्ड का भी लाभ ले रहे हैं । विशाल भूभाग में दो व तीन मंजिला मकान , घर के सामने खड़ी गाड़ियां , सरकारी नौकरी के बावजूद ऐसे अतिक्रमणकारियों को पूरी बुनियादी सुविधाओं के साथ ही शासन के लाभकारी योजनाओं का भी लाभ लेने के बाद भी ये अतिक्रमणकारी गरीबी रेखा में अपना नाम दर्ज होने की जानकारी मिली है ।अनेक शासकीय कर्मियों द्वारा अपने नाम का उल्लेख न कर अपनी पत्नी , पुत्र व रिश्तेदारों के नाम से कब्जा किया गया है । इस अतिक्रमणों में स्वयं नगरपालिका के कर्मचारी भी शामिल हैं । जिनके द्वारा एक बड़े भूभाग पर मकान बनाया गया है ।


महलपारा स्थित बांध के पानी का कैचमेंट एरिया में शासकीय निर्माण और कब्जे हो जाने से अब बांध में पानी पर्याप्त नहीं भर पाता है। कब्जे दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है और कैचमेंट एरिया में रुकावटें आने से बांध की जल भराव क्षमता भी कम होती जा रही है । साथ ही बांध का काफी हिस्सा मिट्टी के पटाव का दंश झेल रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार तालाब और बांधों के जल ग्रहण क्षेत्र पर अवैध कब्जा पुरी तरह से रोके जाने का आदेश है पर यहां तो निजी लोगों की बात छोड़िए शासकीय भवन ही बना दिए गए है।
इस बांध से बालसी सहित पतेरापाली के कृषकों को यह सिंचाई के साथ वार्ड नं 1, 2 व 3 के रहवासियों के निस्तार के लिए काम आता है। बांध में 1985 से ही कब्जा होना आरंभ हो गया था। 12 जनवरी 1987 को तहसीलदार सरायपाली को पत्र लिखकर बांध के क्षेत्र में कब्जा होने की शिकायत सिंचाई विभाग ने की थी। उसके, बाद सिंचाई विभाग लगातार कब्जा रोकने के लिए पत्र लिखती रही है । जल संसाधन विभाग पत्र लिखकर अग्रिम कार्यवाही किए जाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं करता । खानापूर्ति कर वह अपने दायित्व से मुक्त हो जाता है सिर्फ खाना पूर्ति कर वह जिम्मेदारियों से मुकर जाता है । अनेकों बार जल संसाधन विभाग , नगरपालिका , तहसीलदार , एसडीएम कार्यालय से अतिक्रमण हटाए जाने के आदेश तो निकलते हैं पर राजनैतिक दबाव व उसके प्रभाव के आगे वे कार्यवाही नहीं कर पाते हैं । राजनैतिक नेताओं , नपाध्यक्षों व पार्षदों द्वारा अपने वोट बैंको को सुरक्षित रखने व चुनाव में मिलने वाले फायदों के निजी व पार्टी स्वार्थ के चलते नगर में अतिक्रमण को रोकने के बजाय और अधिक संरक्षण व प्रश्रय दिए जाने से सिर्फ इस बांध में ही नहीं नगर के सभी वार्डों में बेतहासा अवैध कब्जे हो रहे हैं । नगर के कुछेक वार्डों को छोड़ दे तो अधिकांश वार्डो में अवैध कब्जा धारियों की बाढ़ सी आ गई है ।
इस बांध से बालसी 195 और पतेरापाली के 43 किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। बालसी के 375. 56 एकड़ और पतेरापाली के 70.53 एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए उपरोक्त किसानों से अनुबंध किया गया है। अधिकारी और पुराने जानकार बताते हैं 100 बिस्तर अस्पताल से लेकर राजमहल के एक पिछले छोर और सड़क से नीचे की तरफ पुरा पानी बहकर इस बांध में आता है। पहली जमकर हुई बारिश में यह बांध पूरी तरह भर जाता है। बांध का निर्माण 50.03 एकड़ में किया गया है तथा इसका कैचमेंट एरिया 318 एकड़ है। इस बांध से उलट के द्वारा नहर निकाली गई है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग से 2016 में मिले दस्तावेजों के अनुसार इस बांध एरिया में 181 लोग नामदर्ज अतिक्रमणकारी हैं । कैचमेंट एरिया में घीडब्लूडी, पीएचई, तहसील कार्यालय, न्यायालय भवन, न्यायधीश आवास, वन डीपो आदि बने है इनमें आधा हिस्सा जिसका खसरा नंबर 109/1 च है, वहां बनी कालोनी भी इसमें शामिल है जिसका खतरा नंबर 109/1 ज है। इसके अलावा छिंद पार जो कि बांध के दूसरे तरफ है जिस पर पुरी तरह अवैध कब्जा हो चुका है। बांध के भीतर खसरा नंबर 112, 113 और 114 के साथ उलट के पास 109/1 ख व 109/1 ब में भी कब्जा है। कैचमेंट एरिया जिसे तकनीकी भाषा में एफटीएल कहा जाता है। ये सभी भवन व कब्जे उसी भूमि में हुए हैं जो कि सीधा सीधा सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।

◾कैचमेंट एरिया में किसी प्रकार का कब्जा गलत ◾

सिंचाई विभाग द्वारा दिए गए दस्तावेज में कहा गया है कि बांध में कब्जा हटवाने के लिए पूरी तरह राजस्व विभाग को लिखते रहे है मगर उन्होंने कभी ध्यान नहीं दिया। नियमतः बांध के कैचमेंट परिया में किसी प्रकार का शासकीय या अशासकीय कब्जा नहीं होना चाहिए। यह सुप्रीम कोर्ट के नियम का उल्लंघन भी है इससे पानी का संग्रहण भी प्रभावित हुआ है। अब सिंचाई के लिए हम किसानों को उतना पानी नहीं दे पाते है जितने का अनुबंध हुआ था । नगर पालिका और विद्युत विभाग को आपत्ति करते हुए पत्र लिखा गया था कि अवैध जगह पर बिजली पानी, सड़क की सुविधा न दी जाए। किंतु नगरपालिका व राजस्व विभाग द्वारा कभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया । जिसके चलते आज कम से कम 300 से अधिक अतिक्रमण हो चुके हैं । जल संसाधन द्वारा 2016 तक लगातार अनुविभागीय अधिकारी , तहसीलदार , नगरपालिका व विद्युत विभाग को पत्र लिखा गया किंतु कोई भी सकारात्मक कार्यवाही किए जाने के बजाय उल्टे अवैध कब्जे उसी तेजी बढ़ते रहे।
महल बांध में बढ़ते अतिक्रमण को रोके जाने हेतु नगर के कुछ लोगों द्वारा एसडीएस सहित सिंचाई विभाग को 19 अप्रैल 2010 को में पत्र लिखकर बांध को बचाने की गुहार लगायी गई थी सिंचाई विभाग ने 9 सितंबर नोटिस भी दी। 2011 को डायरेक्ट कब्जाधारियों को भी नोटिस दी गई पर कार्यवाही कुछ नहीं हो सकी ।

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