मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला एक बार फिर टल गया। सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोई भी वकील पेश नहीं हुआ, जिस पर शीर्ष अदालत ने चिंता जाहिर की। सरकार की अनुपस्थिति के चलते अदालत ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी।
बताया जा रहा है कि ओबीसी आरक्षण से संबंधित यह प्रकरण मंगलवार को सूची में छठे क्रम पर था, लेकिन सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई अधिवक्ता खड़ा नहीं हुआ। इससे पहले भी इसी तरह सुनवाई नहीं हो सकी थी, क्योंकि मामले का नंबर नहीं आ पाया था।
अगले सप्ताह तक के लिए टली सुनवाई
जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल के साथ चार वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त कर रखा है। इसके बावजूद अदालत में कोई प्रतिनिधित्व न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष जताया और सुनवाई को अगले सप्ताह बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
सरकार के रवैये पर कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से लगातार देरी और गंभीरता की कमी चिंता का विषय है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि राज्य के कानूनों की संवैधानिक वैधता की प्राथमिक जांच का अधिकार हाईकोर्ट को अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त है।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
गौरतलब है कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ा यह मामला पहले हाईकोर्ट में लंबित था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। राज्य सरकार ने कई बार बहस के लिए समय मांगा है, लेकिन अब तक अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी है।
फिलहाल मामले की अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है, जिस पर ओबीसी आरक्षण को लेकर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।