रायपुर। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की बीते दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल बीमारियों का उपचार नहीं, बल्कि समय रहते पहचान, प्रभावी रोकथाम और आम नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

मानव संसाधन को बनाया गया स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती उसकी मानव शक्ति पर निर्भर करती है। इसी सोच के साथ पिछले दो वर्षों में डीएचएस और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत डॉक्टर, नर्स और अन्य कैडरों के करीब 1639 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। वहीं 2300 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। एनएचएम के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए हर महीने ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेज़ी से विस्तार
उन्होंने बताया कि स्टाफ के साथ-साथ राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को भी व्यापक रूप से सुदृढ़ किया गया है। 15वें वित्त आयोग, PM-ABHIM और राज्य बजट की सहायता से बीते दो वर्षों में—
- 3 जिला अस्पताल
- 2 सिविल अस्पताल (220 बिस्तर)
- 8 सिविल अस्पताल (100 बिस्तर)
- 1 मानसिक अस्पताल (200 बिस्तर, सेन्दरी)
- 1 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) अस्पताल
- 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- 34 उप-स्वास्थ्य केंद्र
स्वीकृत किए गए हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर बने प्राथमिक देखभाल का केंद्र
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए 12 IPHL लैब, 31 BPHU और 1 क्रिटिकल हेल्थ केयर ब्लॉक को स्वीकृति दी गई है। आगामी तीन वर्षों में राज्य के सभी विकासखंडों में BPHU तथा सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में IPHL लैब स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 3 लाख आरोग्य मेले आयोजित किए गए, जिनमें इलाज के साथ-साथ वेलनेस सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। जल्द ही 75 हाट बाजार मोबाइल मेडिकल यूनिट, 375 एम्बुलेंस और 30 ग्रामीण मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की जाएंगी।


आयुष्मान भारत योजना से करोड़ों का इलाज
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 31.44 लाख से अधिक क्लेम मामलों में 4551 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। राज्य के करीब 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, जिनमें 38.98 लाख कार्ड पिछले दो वर्षों में जारी किए गए।
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत 2273 मरीजों को 62.20 करोड़ रुपये का उपचार लाभ प्रदान किया गया।
गुणवत्ता मानकों में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग
नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम (NQAS) के तहत अब तक 884 शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों को गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त हुआ है। रायपुर और बलौदाबाजार जिला अस्पतालों में संचालित IPHL लैब को केंद्र सरकार से गुणवत्ता प्रमाणन मिला है, जो देश में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले और दूसरे अस्पताल हैं। आने वाले तीन वर्षों में राज्य के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS प्रमाणन दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
टेली-मेडिसिन और गैर संचारी रोगों पर विशेष ध्यान
टेली-मेडिसिन के माध्यम से अब तक 2 लाख से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं, जिससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ मिला।
गैर संचारी रोगों के अंतर्गत 80 लाख से अधिक लोगों की BP और शुगर जांच, जबकि 20 लाख से अधिक नागरिकों की कैंसर स्क्रीनिंग की गई। टीकाकरण लक्ष्य का 94 प्रतिशत से अधिक हासिल किया गया है।
इसके अलावा 21,164 कुपोषित बच्चों को पोषण एवं उपचार उपलब्ध कराया गया।
टीबी, मलेरिया और डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि टीबी, मलेरिया, डेंगू और फाइलेरिया जैसी बीमारियों पर निर्णायक नियंत्रण प्राप्त किया गया है।
टीबी के 12 लाख से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच, 93 प्रतिशत उपचार सफलता दर और 4106 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.6 प्रतिशत से घटकर 0.59 प्रतिशत रह गई है।
जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल और मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं
जनजातीय इलाकों में सिकल सेल रोग पर विशेष अभियान चलाते हुए 1.68 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 27,396 मरीज चिन्हित हुए। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिवासी क्षेत्रों के लिए 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गई हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, मजबूत और जन-केंद्रित बनाया जाएगा।