चंडीगढ़: हरियाणा के बहुचर्चित बैंक घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रिभव ऋषि समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसीबी की टीम ने देर रात छापेमारी कर इन आरोपियों को हिरासत में लिया। जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड रिभव ऋषि पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मैनेजर रह चुका है और वर्तमान में जीरकपुर स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में कार्यरत था।
सरकारी खजाने में सेंधमारी की साजिश
जांच के अनुसार, रिभव ऋषि ने ही फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन के गबन की योजना तैयार की थी। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से लगभग 590 करोड़ रुपये निकालने की साजिश रची। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों की पहचान अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति के रूप में हुई है।
जुलाई में ही मिली थी गड़बड़ी की भनक
इस वित्तीय अनियमितता का पता सरकार को पिछले साल जुलाई में ही चल गया था। इसके बाद वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ने सभी विभागों को पत्र लिखकर सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि कई सरकारी विभागों के मुख्यालय पंचकूला में होने के बावजूद, उनके खाते चंडीगढ़ स्थित बैंक शाखाओं में खोले गए थे। अब सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री: पूरी राशि बरामद
इस मामले पर चल रहे सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से ब्याज सहित पूरी रकम रिकवर कर ली गई है। दूसरी ओर, एसीबी के सूत्रों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि आखिर किन कारणों से पंचकूला के बजाय चंडीगढ़ के बैंकों में खाते खोलने को प्राथमिकता दी गई।