भानुप्रतापपुर। भानुप्रतापपुर एवं दुर्गुकोंदल क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन और अवैध रेत उत्खनन को लेकर आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के प्रदेश सचिव हरेश चक्रधारी ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि क्षेत्र में रेत माफिया का ‘आतंक’ चरम पर है, जिसे स्थानीय प्रशासन और सत्तापक्ष का मौन संरक्षण प्राप्त है। प्रशासनिक मिलीभगत और मशीनीकृत उत्खनन किया जा रहा है।
श्री चक्रधारी ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि नदियों का अस्तित्व खतरे में है। नियमों के अनुसार रेत निकासी के लिए केवल मैनुअल (मजदूरों द्वारा) लोडिंग की अनुमति है, लेकिन यहाँ ‘चैन माउंटेड’ मशीनों का उपयोग कर पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचाई जा रही है।
विभाग की कार्यवाही केवल ‘आईवॉश’ (दिखावा) है। दिन में जब्ती का नाटक होता है और रात में वही मशीनें माफिया के इशारे पर फिर से गरजने लगती हैं। यह सांठगांठ सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और प्रकृति की चोरी है।
सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का षड्यंत्र
विज्ञप्ति में एक बेहद संवेदनशील पहलू को उजागर किया गया है। चक्रधारी ने बताया कि माफिया अपनी अवैध गतिविधियों को वैधानिक कवच देने के लिए ‘पेसा कानून’ और ‘पांचवीं अनुसूची’ की भ्रामक व्याख्या कर रहे हैं। बिचौलियों के माध्यम से भोले-भाले ग्रामीणों को आपस में लड़ाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। प्रशासन इस टकराव को रोकने के बजाय तटस्थ बना हुआ है।
पंचायत फंड पर डकैती: प्रति हाइवा ₹7,000 की अवैध वसूली
भारी वाहनों के दबाव से जर्जर हुईं ग्रामीणों की सड़कें
हरेश चक्रधारी ने एक और गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि रेत माफिया न केवल नदियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों की बुनियादी सुविधाओं पर भी डाका डाल रहे हैं। उन्होंने कहा ग्रामीणों की सुविधा और आवागमन के लिए शासन द्वारा करोड़ों की लागत से जो सड़कें बनाई गई थीं, वे आज अवैध रेत परिवहन के कारण जर्जर और खस्ताहाल हो चुकी हैं। भारी-भरकम हाइवा और मशीनों के अनियंत्रित दबाव से सड़कों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है, जिससे आम जनता का चलना दूभर हो गया है। माफिया के मुनाफे की कीमत अब ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा और सुविधा खोकर चुकानी पड़ रही है।
भ्रष्टाचार के गणित को स्पष्ट करते हुए आप नेता ने कहा कि ग्राम पंचायतों के अधिकारों का खुला हनन हो रहा है।
- अदृश्य मुनाफ़ाखोरी: लीज ग्राम पंचायतों के नाम पर ली गई है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण बिचौलियों का है।
- विकास की हानि: प्रति वाहन ₹7,000 की जो वसूली बिचौलियों की जेब में जा रही है, वह यदि पंचायत के कोष में जमा होती, तो आज गांवों का कायाकल्प हो चुका होता।
- कड़ा रुख: चक्रधारी ने मांग की है कि अक्षम पंचायतों की लीज तत्काल निरस्त की जाए ताकि बिचौलियों का राज खत्म हो सके।
आम आदमी पार्टी की निर्णायक मांगें
- पूर्ण प्रतिबंध: नदियों में भारी मशीनों के उपयोग पर तत्काल रोक लगे और केवल स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिले।
- वित्तीय पारदर्शिता: पंचायतों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर सीधे वित्तीय अधिकार सौंपे जाएं।
- कठोर कार्यवाही: पेसा कानून का दुरुपयोग कर ग्रामीणों को उकसाने वाले तत्वों और लापरवाह अधिकारियों पर केस दर्ज हो।
हरेश चक्रधारी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी और रेत के इस काले कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया, तो आम आदमी पार्टी क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर विशाल जन-आंदोलन हेतु बाध्य होगी।