रायपुर: छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में अतिथि व्याख्याताओं का योगदान अब किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि शिक्षकों की कमी के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षण व्यवस्था को मिला संबल
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था न केवल सहायक प्राध्यापक और प्राध्यापक पदों के लिए है, बल्कि ग्रंथपाल (Librarian) और क्रीड़ा अधिकारी (Sports Officer) के रिक्त पदों पर भी लागू है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षण सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की शैक्षणिक बाधा को रोकना है।
योग्यता और गुणवत्ता का संगम
अतिथि व्याख्याताओं की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए विभाग ने बताया कि वर्तमान में कार्यरत अधिकांश शिक्षक पीएच.डी. (Ph.D.) उपाधिधारी हैं। साथ ही, बड़ी संख्या में ये शिक्षक NET/SET जैसी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर चुके हैं। उनकी यह उच्च योग्यता महाविद्यालयों में शिक्षा के स्तर को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सारथी
बदलते दौर और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप, ये शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को धरातल पर उतारने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) के माध्यम से वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य के महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि व्याख्याताओं की तैनाती।
उच्च शैक्षणिक योग्यता (Ph.D, NET, SET) से सुसज्जित शिक्षक दल।
शैक्षणिक कार्यों में निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर।
छत्तीसगढ़: उच्च शिक्षा की रीढ़ बने अतिथि व्याख्याता, शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने में निभा रहे अहम भूमिका
14
Mar