(अंबिकापुर सरगुजा) संस्कृति विभाग अंतर्गत पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय रायपुर द्वारा आज जिला पुरातत्व संग्रहालय सरगवां अंबिकापुर में 05 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला के माध्यम से सरगुजा अंचल के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने आंचलिक इतिहास और संस्कृति की सम्यक जानकारी और पुरास्थलों सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के संबंध जानकारी दी जा रही है।
संचालक विवेक आचार्य और डॉ. प्रताप चंद पारख के नेतृत्व में तैयार इस 05 दिवसीय कार्यक्रम में कुल 14 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे और अंतिम दिन पुरास्थल का परिभ्रमण कर प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों का अध्ययन करेंगे।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महापौर मंजूषा भगत शामिल हुईं। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यशाला में सरगुजा अंचल के पुरातत्व और संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लेने और सीखने के लिए शुभकामनाएं दीं।
सत्र की अध्यक्षता कर साहित्यकार आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने आयोजन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए अपनी शोध यात्रा सरगुजा एक खोज के संबंध में उपयोगी जानकारी प्रदान की और सरगुजा स्थान नाम के बारे में विभिन्न अवधारणाओं को प्रस्तुत किया। शुभारंभ सत्र को वरिष्ठ अध्येता श्रीश मिश्रा, पीजी कॉलेज में इतिहास की विभागाध्यक्ष डॉ. ममता गर्ग ने भी संबोधित किया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। आज के तकनीकी सत्रों में श्रीश मिश्र ने रामगढ़ के गुफालेखों के ऐतिहासिक महत्व पर, बोधगया विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. सचिन मंदिलवार ने सरगुजा के रियासत कालीन इतिहास और पुरातत्व पर और अजय कुमार चतुर्वेदी ने सरगुजा अंचल की लोक संस्कृति और उनके संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। कार्यशाला में 90 प्रतिभागी और जिला पुरातत्व संघ सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, कोरिया, एमसीबी जिले के 10 सदस्य भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर श्रीश मिश्र ने अपनी कृति संदर्भ रामगढ़ मुख्य की प्रति मुख्य अतिथि और पुरातत्त्व विभाग को भेंट की और डॉ. अजय पाल सिंह द्वारा लिखित पुस्तक पर्यटन एक समग्र अध्ययन का