संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय में “शिक्षण-अधिगम सामग्री” की भव्य प्रदर्शनी आयोजित

अम्बिकापुर। संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय में शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को बी.एड. प्रथम सेमेस्टर के प्रशिक्षार्थियों द्वारा टीएलएम (शिक्षण-अधिगम सामग्री) मॉडल प्रदर्शनी का शानदार आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंजन सिंह के मार्गदर्शन तथा सहायक प्राध्यापक सुमन पांडे, डॉ. पूजा दुबे, डॉ. रानी पांडे, चंदा सिंह और श्वेता तिवारी के निर्देशन में संपन्न हुआ।

प्रदर्शनी के अवलोकन और मूल्यांकन के लिए निर्णायक टीम में के.सी. गुप्ता (प्रिंसिपल डाइट, अम्बिकापुर), डॉ. फादर कल्याणुस मिंज (प्रिंसिपल सेंट जेवियर महाविद्यालय), ओमकार नाथ तिवारी (लेक्चरर डाइट) और विनय सिंहा (सेवानिवृत्त शिक्षक) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश स्तुति और मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके बाद निर्णायक मंडल का स्वागत तिलक लगाकर और स्वागत गीत के साथ किया गया।

नवाचार और रचनात्मकता का प्रदर्शन टीएलएम प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान और जैविक विज्ञान विषयों पर प्रशिक्षार्थियों ने आकर्षक मॉडल प्रस्तुत किए:

  • जैविक विज्ञान: जल चक्र, पर्यावरण सुरक्षा, मानव हृदय संरचना, सौर मंडल, पाचन तंत्र, और अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन जैसे विषयों पर सक्रिय व स्थिर मॉडल दिखाए गए।
  • गणित: ज्यामिति आकृति, वर्गमूल, स्थानीय मान और समांतर श्रेणी जैसे कठिन विषयों को नवाचार तकनीक के माध्यम से बेहद सरल और बोधगम्य बनाया गया।
  • सामाजिक विज्ञान: आदिमानव का विकास, महापुरुषों का जीवन परिचय, ग्लोबल वार्मिंग, बायोगैस संयंत्र और यातायात नियमों पर आधारित मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे।
  • भाषा (हिंदी/अंग्रेजी): निबंध लेखन, समास, क्रिया और लिंग जैसे व्याकरणिक विषयों को रचनात्मक ढंग से समझाया गया।

विशेषज्ञों ने दिया भविष्य के लिए मार्गदर्शन अवलोकन के पश्चात डॉ. कल्याणुस मिंज और प्राचार्य अंजन सिंह ने प्रशिक्षार्थियों की मेहनत की सराहना की। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षार्थी स्थिर मॉडल के बजाय सक्रिय (वर्किंग) मॉडल पर अधिक ध्यान दें। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने वाले यंत्रों और सामाजिक बुराइयों को दूर करने वाले मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया ताकि वे समाज के लिए ‘रोल मॉडल’ बन सकें।

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य ने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षार्थियों को शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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