केना धान उपार्जन केंद्र में 50 लाख की गड़बड़ी का खुलासा: भौतिक सत्यापन के बाद प्रभारी गोपाल नायक पर FIR दर्ज, आरोपी फरार

सरायपाली। यदि उच्च अधिकारी सख्त और जिम्मेदार हों, तो व्यवस्थाएं अपने आप सही रास्ते पर आ जाती हैं। इसका जीता-जागता प्रमाण महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और सरायपाली की नवपदस्थ एसडीएम सुश्री अनुपमा आनंद की कार्यशैली में देखने को मिल रहा है। प्रशासनिक कसावट का ही परिणाम है कि सरायपाली क्षेत्र के केना धान उपार्जन केंद्र में भौतिक सत्यापन के दौरान 50 लाख रुपये से अधिक की भारी गड़बड़ी उजागर हुई है, जिसके बाद केंद्र प्रभारी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।

जांच में खुली पोल: 1600 क्विंटल से अधिक धान गायब

कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच टीम ने 18 जनवरी 2026 को केना केंद्र का आकस्मिक भौतिक सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 29,628 नग बारदाने (11,851.20 क्विंटल धान) होने चाहिए थे, लेकिन मौके पर मात्र 25,615 नग बारदाने (10,246 क्विंटल धान) ही मिले। इस प्रकार कुल 1,605.20 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 49,76,120 रुपये आंकी गई है।

बारदाने और तौल में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता

जांच प्रतिवेदन के अनुसार, केवल धान ही नहीं बल्कि बारदानों के उपयोग में भी भारी हेरफेर मिला है। 2007 नग नए बारदाने और 2006 नग पुराने बारदानों का अनियमित उपयोग पाया गया। कुल मिलाकर शासन को 50,41,924.60 रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचाई गई है। इसके अलावा, जब जांच टीम ने धान की बोरियों का रैंडम तौल कराया, तो वजन भी मानक से काफी कम पाया गया।

कलेक्टर के निर्देश पर एफआईआर, आरोपी प्रभारी फरार

इस गंभीर अनियमितता की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के आदेश पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित रायपुर (शाखा तोरेसिंहा) के प्रबंधक द्वारा सरायपाली थाने में लिखित आवेदन देकर प्रभारी गोपाल नायक (निवासी ग्राम इच्छापुर) के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी प्रभारी केंद्र छोड़कर फरार हो गया है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

14 कोचियों पर भी प्रशासन की पैनी नजर

क्षेत्र में धान तस्करी और अवैध भंडारण के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया गया है। पहली बार 14 बड़े कोचियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से एक कोचिए सोनू अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है। शेष 13 कोचियों पर भी एफआईआर की प्रक्रिया जारी है। “आज की जनधारा” समाचार पत्र भी समय-समय पर सभी केंद्रों के भौतिक सत्यापन की मांग उठाता रहा है, जिसकी शुरुआत केना केंद्र से हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी केंद्रों का निष्पक्ष सत्यापन हो, तो कई अन्य बड़े घोटाले भी सामने आ सकते हैं।

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