जानी पहचानी दीवार की खिड़की

दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास दीवार में खिड़की रहती थी का एक पोस्ट हिंदी युग में बनाकर खिड़की बनाई है इस तरह की खिड़की इन्होंने पहले भी रायपुर में जब विनोद जी पर आयोजन किया था तब भी बनाई थी यह खिड़की इस समय बहुत लोकप्रिय है और लोग इस खिड़की में खड़े होकर अपनी तस्वीर लेना चाहते हैं । हिंदी युग्म में एक तरफ खिड़की बनाई है दूसरी तरफ विनोद जी की तस्वीर विनोद जी की तरह नहीं थी । हिंदी युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने अपने स्टॉल का शुभारंभ विनोद जी के बेटे शाश्वत गोपाल से कराया । यह भी आयोजन में नवाचार रहा । राजनीतिक रुझान के दौर में इसे अनूठी पहल और साहित्यिक सौजन्य की तरह देखा गया ।

शैलेश भारतवासी ने बताया की नई पीढ़ी के पाठक विनोद जी की पुस्तकें रुचि से खरीद रहे हैं । पुस्तक मेले में इस बार बहुत सारे छोटे प्रकाशक भाग नहीं ले पाए हैं उसकी वजह यह बताई गई कि इस बार स्टॉल के किराए में बहुत ज्यादा वृद्धि की गई थी । इतने भारी किराए को छोटे प्रकाशक वहन नहीं कर सके । इस कारण अनेक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण प्रकाशक पुस्तक मेले में नजर नहीं आए । मेले की इस बार खासियत यह भी है कि अनेक हाल को मिलाकर एक लंबा गलियारा बना दिया गया है , जहां हिंदी और अंग्रेजी के तमाम प्रकाशकों के स्टॉल हैं । पहले अलग-अलग हाल में होता था और पाठकों और पुस्तक खरीदने वालों को भटकना पड़ता था ।

मेले में इस बार बहुत ज्यादा नेताओं के फोटो और पोस्टर लगे हैं यह भी थोड़ा चौंकाने वाला दृश्य है । पुस्तक मेला पूरे शबाब पर है ।यह पुस्तक मेला देशभर के साहित्यकारों से मिलने का सुअवसर भी है। हम आनंद हर्षुल और भालचंद्र जोशी के साथ कल मधु चतुर्वेदी , जयंती रंगनाथन , हरि नारायण , मदन कश्यप , भगवानदास मोरवाल , लीलाधर मंडलोई ,निधि अग्रवाल , अपर्णा श्रीवास्तव , अंजू शर्मा , डॉ सुनीता , अनिल रंजन भौमिक , अशोक मिश्र , और अनेक साहित्यकारों से भेंट हुई । किताबों के बीच घूमने किताबों को देखना अच्छा अनुभव है ।’आज की जनधारा ‘ की साहित्य वार्षिकी जोहिंदी की कालजयी रचनाओं पर केंद्रित है । इसका विमोचन भी हॉल नंबर 3 और 2 में दोपहर 3:00 बजे होगा । आप सादर आमंत्रित हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *