तातापानी में जमीन से पैदा होगी बिजली: क्रेडा और NGRI के बीच हुआ एमओयू, दो साल तक चलेगा वैज्ञानिक अध्ययन

Tatapani Geothermal Project : रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में स्थित तातापानी जियो थर्मल क्षेत्र (भू-तापीय ऊर्जा) के विकास के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। तातापानी के गर्म जल स्त्रोतों से बिजली बनाने की संभावनाओं को तलाशने के लिए क्रेडा (CREDA) और सीएसआईआर-एनजीआरआई (CSIR-NGRI), हैदराबाद के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

दो साल तक होगा वैज्ञानिक रिसर्च
इस समझौते के तहत एनजीआरआई के वैज्ञानिक अगले दो वर्षों तक तातापानी क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन करेंगे। इस रिसर्च के दौरान अत्याधुनिक उपकरणों और सेंसर के माध्यम से डेटा जुटाया जाएगा। अध्ययन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

भू-तापीय जल स्रोत की मात्रा और गहराई का सटीक आकलन।

गर्म पानी के तापमान और दबाव का वैज्ञानिक विश्लेषण।

जियोथर्मल ऊर्जा से बिजली उत्पादन की तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं का परीक्षण।

छत्तीसगढ़ को मिलेगा 24×7 स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प
अगर अध्ययन के परिणाम सकारात्मक रहे, तो तातापानी में भू-तापीय विद्युत परियोजना की स्थापना की जाएगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि:

इससे 24 घंटे लगातार और प्रदूषण मुक्त बिजली का उत्पादन संभव होगा।

राज्य की सौर और पवन ऊर्जा के अलावा भू-तापीय ऊर्जा पर भी निर्भरता बढ़ेगी।

छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जो जमीन की गर्मी से बिजली बनाते हैं।

क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी और सीईओ राजेश सिंह राणा के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में बताया गया कि डेटा विश्लेषण के बाद खुली निविदा के माध्यम से प्रोजेक्ट डेवलपर का चयन किया जाएगा। एमओयू के दौरान क्रेडा और एनजीआरआई के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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