नई दिल्ली। ईद-उल-फितर का पर्व नजदीक आते ही देशभर में उत्साह का माहौल है। एक महीने तक इबादत, आत्मसंयम और रोजा रखने के बाद ईद का दिन खुशियां बांटने और अल्लाह का आभार व्यक्त करने का अवसर लेकर आता है। इस बार ईद की तारीख को लेकर लोगों में उत्सुकता है, क्योंकि यह पूरी तरह से चांद के दीदार पर निर्भर करती है।
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान के समापन के बाद शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और इसी का पहला दिन ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है। यदि 19 मार्च की शाम को शव्वाल का चांद दिखाई देता है, तो भारत में ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी। यदि चांद के दीदार नहीं होते हैं, तो रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद ईद का पर्व 21 मार्च को मनाया जाएगा। देश में ईद की अंतिम तारीख की घोषणा स्थानीय चांद कमेटियों और धार्मिक संगठनों द्वारा चांद दिखने के बाद ही की जाएगी।
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं और इबादत में समय व्यतीत करते हैं। इसके बाद शव्वाल का पहला दिन ईद के रूप में मनाया जाता है।
ईद-उल-फितर के इतिहास की बात करें, तो इस्लामी परंपराओं में इसकी शुरुआत पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के समय से मानी जाती है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार सन् 624 ईस्वी में बदर की ऐतिहासिक लड़ाई के बाद पहली बार ईद-उल-फितर मनाई गई थी। तब से यह पर्व आपसी भाईचारे, प्रेम, दया और आस्था के संदेश के साथ पूरी दुनिया में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है।