भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस बार ईद का मंजर कुछ अलग ही नजर आया। शहर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज तो अदा की गई, लेकिन इस बार उल्लास के साथ-साथ विरोध और गम का माहौल भी हावी रहा। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ी और मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) के हालात को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
नारेबाजी और विरोध का स्वर: ईद की नमाज मुकम्मल होने के बाद भोपाल की सड़कों पर ईरान के समर्थन में आवाजें गूंजीं। नमाजियों ने इजरायल और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विशेष रूप से शिया समुदाय ने फतेहगढ़ इमामबाड़ा में ‘काली ईद’ मनाई। यहाँ लोग नए कपड़ों के बजाय सादे और पुराने लिबास में पहुंचे, जिससे माहौल गमगीन नजर आया। कई स्थानों पर आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।
मस्जिदों में नमाज का सिलसिला: राजधानी में सुबह से ही मस्जिदों में नमाजियों का तांता लगा रहा।
- ईदगाह मस्जिद: सुबह 7:30 बजे ईद की पहली नमाज अदा की गई।
- जामा मस्जिद: सुबह 7:45 बजे नमाज हुई।
- ताज-उल-मसाजिद: मौलाना हस्सान साहब की सरपरस्ती में सुबह 8:00 बजे विशेष दुआ कराई गई, जिसमें देश और दुनिया में अमन-चैन की प्रार्थना की गई।
- मोती मस्जिद: यहाँ सुबह 8:15 बजे नमाजियों ने खुतबा सुना और नमाज पढ़ी।
सुरक्षा और इंतजाम: प्रशासन की ओर से सुन्नी और शिया मस्जिदों में नमाज के लिए अलग-अलग और पुख्ता इंतजाम किए गए थे। शहर के अन्य हिस्सों और प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी शांतिपूर्ण तरीके से नमाज संपन्न हुई, हालांकि विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधने का असर कई जगहों पर देखा गया।