रायपुर। महादेव ऑनलाइन बुक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ईडी ने अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े प्रमोटरों और उनके सहयोगियों की 21.45 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई इस बड़े सट्टेबाजी रैकेट की चल रही जांच का हिस्सा है।
ईडी ने 10 जनवरी 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया, जिसके तहत 98.55 लाख रुपये की चल संपत्ति और भारत व दुबई में स्थित 27 अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। इन संपत्तियों में आवासीय मकान, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि और लग्जरी अपार्टमेंट शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 20.46 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईडी ने जिन लोगों की संपत्तियां अटैच की हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं—
रवि उप्पल: मुख्य प्रमोटर के रूप में पहचाना गया जो अभी भी फरार है। आदेश में दुबई में लगभग 6.75 करोड़ रुपये की एक विदेशी संपत्ति अटैच की गई है।
रजत कुमार सिंह: सौरभ चंद्राकर का करीबी सहयोगी जिसने कई पैनल चलाए और 15-20 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई की। अटैच की गई संपत्तियों में भिलाई और दुबई की संपत्तियां शामिल हैं।
सौरभ आहूजा और विशाल रमानी: पार्टनर जिन्होंने लगभग 100 पैनल चलाए और लगभग 30 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई की। दुर्ग और भिलाई की संपत्तियां अटैच की गई हैं।
विनय कुमार और हनी सिंह: उन्होंने छह पैनल चलाए और सट्टेबाजी ऐप के फर्जी प्रमोशन में शामिल थे। उन्होंने अनुमानित 7 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई की। अटैचमेंट में जयपुर और नई दिल्ली में आवासीय संपत्तियां तथा महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर सहित वाहन शामिल हैं।
लकी गोयल: वह टेलीग्राम-आधारित प्रमोशन में शामिल था और लगभग 2.55 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई की। आदेश के तहत राजस्थान में कई दुकानें और प्लॉट अटैच किए गए।
राजा गुप्ता: दुबई स्थित ऑपरेटर जो कम से कम 10 पैनल मैनेज करता था। रायपुर में एक अचल संपत्ति जो अपराध की कमाई से हासिल की गई थी, उसे अटैच किया गया।
छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी द्वारा शुरू की गई जांच में एक बड़े सट्टेबाजी गिरोह का खुलासा हुआ। यह प्लेटफॉर्म टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर247 जैसे डोमेन नामों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी सेवाएं प्रदान करता था। यह गिरोह सहयोगियों द्वारा संचालित पैनल/शाखाओं के फ्रेंचाइजी मॉडल के माध्यम से काम करता था, जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से अपना संचालन करते थे।
जांच से पता चला कि इन पैनलों द्वारा अर्जित कुल मुनाफे का 70-75 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटरों ने अपने पास रखा, जबकि शेष पैनल संचालकों ने। भोले-भाले व्यक्तियों के केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग करके खोले गए हजारों फर्जी बैंक खातों के माध्यम से संभावित ग्राहकों को निशाना बनाया गया था।
इस मामले में अब तक ईडी ने 175 से अधिक परिसरों पर तलाशी ली है। चल रही जांच के परिणामस्वरूप लगभग 2,621 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त, फ्रीज या अटैच किया गया है।
इसके अलावा ईडी ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब तक दायर की गई पांच अभियोजन शिकायतों में 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है।