खेतों से लेकर अंतरिक्ष तक विकास की गूँज : 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की उपलब्धियों, नारी शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को रेखांकित किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर की और नागरिकों से एक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण हेतु एकजुट होने का आह्वान किया।

नारी शक्ति का बढ़ता सामर्थ्य
राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने गर्व के साथ जिक्र किया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप और ब्लाइंड वर्ल्ड कप जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 57 करोड़ जन-धन खातों में से 56 प्रतिशत महिलाओं के हैं। साथ ही, देश में 10 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।

अन्नदाता और आदिवासी कल्याण
किसानों को भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार जैविक खेती, किफायती ऋण और पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से उन्हें सशक्त बना रही है। आदिवासी समुदायों के लिए शुरू किए गए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘पीएम-जनमन’ योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सिकल सेल एनीमिया मिशन के तहत 6 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जो स्वास्थ्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और वैश्विक पहचान
राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस के साथ-साथ ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने सुब्रमण्य भारती और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान को याद करते हुए इसे भारत की ‘संगीतमय राष्ट्रीय प्रार्थना’ बताया। प्रवासी भारतीयों (Diaspora) की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे विदेशों में रहकर भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं और भारत के वैश्विक प्रभाव को बढ़ा रहे हैं।

अंत में, उन्होंने युवाओं से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘जय हिंद’ के नारे और उनके पराक्रम से प्रेरणा लेने का आग्रह किया, ताकि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

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