रायपुर में खेल सुविधाओं की कमी के कारण तैराकी प्रशिक्षणार्थी बच्चों को खारुन नदी में जोखिम भरा अभ्यास करना पड़ रहा है

रायपुर। राजधानी रायपुर में खेल सुविधाओं की अपर्याप्तता और रखरखाव की कमी एक बार फिर चर्चा में है। खारुन नदी में महादेव घाट के निकट बने गहरे एनीकट में बच्चे जान जोखिम में डालकर तैराकी का अभ्यास कर रहे हैं। यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील और खतरनाक घोषित किया जा चुका है तथा यहां नगर निगम के फिल्टर प्लांट के पास पूर्व में कई डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों के बाद नगर निगम द्वारा चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए थे।

ट्राइबल गेम्स की प्रतियोगिताएं जारी हैं और ओपन स्विमिंग स्पर्धा अगले महीने प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशिक्षण की आवश्यकता को देखते हुए बच्चों को नगर निगम द्वारा संचालित स्विमिंग पूल में अभ्यास कराना चाहिए था, लेकिन पूल मेंटेनेंस कार्य के कारण 22 दिसंबर से बंद है। पूल कर्मचारियों के अनुसार पिछले पांच दिनों से ठेकेदार कार्यस्थल पर नहीं पहुंचा है। टाइल्स, पाइप फिटिंग, सफाई तथा पानी की शुद्धता संबंधी कार्य अभी बाकी हैं। यदि कार्य ठीक ढंग से होता है तो पूर्ण होने में कम से कम एक महीना और लग सकता है। इस पूल पर प्रतिदिन 500 से 700 बच्चे निर्भर रहते हैं।

कोच प्रमोद फरिकार ने बताया कि स्विमिंग पूल की मरम्मत के कारण तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिता के निकट होने से मजबूरी में बच्चों को नदी में लाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चे तैराकी में दक्ष हैं तथा अभ्यास के दौरान अभिभावक भी मौजूद रहते हैं। हालांकि किसी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी पर उन्होंने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।

नदी में अभ्यास कर रहे बच्चों के अभिभावकों ने स्थिति को अत्यंत खतरनाक बताया। उनका कहना है कि स्विमिंग पूल और नदी के बहाव में जमीन-आसमान का अंतर है। नदी में सांस जल्दी फूलती है, पानी गंदा रहता है, नुकीले पत्थर, फिसलन भरी सतहें तथा मछली पकड़ने के जाल लगे रहते हैं। बच्चों ने भी स्वीकार किया कि यहां अभ्यास करते समय डर लगता है, लेकिन मजबूरी है। अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजधानी रायपुर में बच्चों को नदी में अभ्यास करना पड़ रहा है, जो बेहद शर्मनाक है।

महापौर मीनल चौबे ने इस संबंध में कहा कि बच्चों के लिए स्विमिंग पूल उपलब्ध है और वे वहीं अभ्यास करें। मेंटेनेंस का कार्य थोड़ा बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

यह मामला शहर में खेल सुविधाओं के रखरखाव एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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