सोनहत,कोरिया। कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्र देवगढ़ में इन दिनों वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिले का महत्वपूर्ण बताया बैकुण्ठपुर रेंज और देवगढ़ रेंज वर्तमान में केवल एक ही रेंजर के भरोसे संचालित हो रहा है। प्रशासन का यह “अतिरिक्त प्रभार” वाला रवैया वनों की सुरक्षा और विभाग के नियमित कार्यों के लिए घातक साबित हो रहा है।
अतिरिक्त प्रभार से चरमराई व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि देवगढ़ और बैकुण्ठपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी को सौंपी गई है। नियमानुसार, मुख्यालय का रेंज सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण होता है, जहाँ प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ जंगलों की सघन निगरानी की आवश्यकता होती है। लेकिन एक अधिकारी के पास दो-दो रेंजों का प्रभार होने के कारण न तो कार्यालयीन कार्य समय पर पूरे हो पा रहे हैं और न ही मैदानी स्तर पर गश्त हो पा रही है।
अवैध कटाई का ‘तांडव’ जारी इन दोनों क्षेत्रों में इन दिनों लकड़ी माफियाओं का जबरदस्त तांडव देखने को मिल रहा है। बेशकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई अब हर दिन की बात हो गई है। रेंजर की अनुपस्थिति और निगरानी के अभाव का फायदा उठाकर माफिया रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी जंगलों को खोखला कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में सोनहत के घने जंगल सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद सिर्फ अवैध कटाई ही नहीं, बल्कि वन भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। देवगढ़ के सीमावर्ती और भीतरी वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है। रेंजर के पास दोहरी जिम्मेदारी होने के कारण वे समय पर मौके पर नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिसका लाभ उठाकर लोग जंगलों को साफ कर खेती और अवैध निर्माण कर रहे हैं।
सुरक्षा पर बड़ा संकट देवगढ़ क्षेत्र वन्यजीवों की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में वन रक्षक और अन्य कर्मचारियों पर उचित मार्गदर्शन और नेतृत्व की कमी साफ देखी जा सकती है। जब मुख्यालय ही एक रेंजर के भरोसे चल रहा हो, तो दूरस्थ बीटों की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।