शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में कलेक्टर ऋजु बाफना और आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आबकारी अधिकारी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई को निराधार बताते हुए विनय रंगशाही को पुनः उनके पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।
यह विवाद सितंबर-अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था। कलेक्टर ऋजु बाफना ने आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही पर कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए थे। कलेक्टर का कहना था कि आबकारी अधिकारी महत्वपूर्ण समय पर फोन नहीं उठाते थे और जिला कार्यालय में आयोजित होने वाली बैठकों से भी अक्सर नदारद रहते थे। इसके अलावा उन पर आरोप था कि वे मुख्यालय के बजाय अधिकांश समय इंदौर में बिताते थे और उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ रहता था।
इसी विवाद के चलते फरवरी 2026 में कलेक्टर ने आबकारी अधिकारी को तीन पन्नों का कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा था। विनय रंगशाही ने 16 फरवरी को इस नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन आरोप है कि उनके जवाब देने से पहले ही संयुक्त आयुक्त आशीष सिंह ने बिना किसी विस्तृत जांच के उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया था।
निलंबन की इस कार्रवाई के खिलाफ आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश ने कलेक्टर द्वारा लगाए गए आरोपों और निलंबन की प्रक्रिया को दोषपूर्ण पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन का आधार पर्याप्त नहीं था और आदेश को रद्द करते हुए अधिकारी की तत्काल बहाली का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस अदालती आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।