जयपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वेदों और सनातन परंपरा को लेकर एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज वेदों से दूर रहा तो आने वाली पीढ़ियों में सांस्कृतिक जड़ें कमजोर होंगी। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान शास्त्री ने बताया कि उनका लक्ष्य देशभर में गुरुकुलों की स्थापना करना है, ताकि सनातनी बच्चे वैदिक शिक्षा प्राप्त कर सकें और अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक संरक्षण के लिए वेदों की ओर लौटना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बागेश्वर धाम में गुरुकुल की स्थापना की जाएगी, जहां वेदों का विधिवत अध्ययन कराया जाएगा। शास्त्री ने कहा, “भोजन एक दिन तक साथ देता है, पानी कुछ समय तक, लेकिन विद्या जीवन भर साथ रहती है। इसलिए वेदों की परंपरा को आगे बढ़ाना हमारा संकल्प है।”

आधुनिक साधनों से वैदिक परंपरा का विस्तार
वैदिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए धीरेंद्र शास्त्री ने तकनीकी माध्यमों का सहारा लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि चार जनवरी को लगभग तीन लाख लोगों ने एक साथ सामूहिक हवन में भाग लिया। आगामी बारह फरवरी को रात्रि नौ बजे पुनः सामूहिक हवन का आयोजन किया जाएगा। जिन घरों तक पुरोहित नहीं पहुंच पाते या जहां संसाधनों की कमी है, वहां मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न कराया जाएगा, ताकि घर-घर यज्ञ की परंपरा फिर से स्थापित हो सके।
वेद और यज्ञ की परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प
शास्त्री ने कहा कि उनका उद्देश्य देश को फिर से वेद और यज्ञ की गौरवशाली परंपरा से जोड़ना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें और वेदों के अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाएं।

कन्या विवाह उत्सव में संतों का समागम
बागेश्वर धाम में होने वाले कन्या विवाह उत्सव को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी। इस वर्ष यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा। तेरह फरवरी को मंडप और हल्दी, चौदह फरवरी को संगीत और मेहंदी, तथा पंद्रह फरवरी को तीन सौ बेटियों का कन्यादान किया जाएगा। शास्त्री ने बताया कि जिन बेटियों के माता-पिता नहीं हैं, उनका विवाह बागेश्वर धाम द्वारा कराया जाएगा, ताकि उन्हें धर्मज माता-पिता का स्नेह और संरक्षण मिल सके।