सुप्रीम कोर्ट से देवेंद्र यादव को करारा झटका — शपथ पत्र में कोर्ट से घोषित फरार होने की जानकारी छुपाने और संपत्ति खुलासे पर उठे सवाल, एसएलपी खारिज

नई दिल्ली। 65-भिलाई नगर विधानसभा निर्वाचन से जुड़े चुनाव याचिका प्रकरण में देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का सामना करने का निर्देश दिया।

यह मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश के विरुद्ध था, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेम प्रकाश पांडे की चुनाव याचिका को प्रारंभिक चरण में खारिज करने से इंकार करते हुए विस्तृत परीक्षण के लिए स्वीकार किया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत एवं माननीय न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष हुई।

देवेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नरेंद्र हुड्डा ने तर्क रखा कि—

चुनाव शपथपत्र में ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ (घोषित फरार आरोपी) की स्थिति का उल्लेख करना आवश्यक नहीं था।

वर्ष 2018 एवं 2023 के शपथपत्रों में संपत्ति का मूल्य गलत दर्शाया जाना केवल अनजाने में हुई त्रुटि थी, न कि कोई जानबूझकर किया गया छुपाव।

चुनाव अवधि में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड श्री सुमेर सोढ़ी भी उपस्थित रहे।

पाण्डेय पक्ष की दलील

प्रेम प्रकाश पाण्डेय जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी. एल. हंसारिया एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रविशंकर जंधालिया ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि—

यदि प्रत्याशी को किसी आपराधिक प्रकरण में ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’(फरार) घोषित किया गया है, तो यह मतदाताओं के जानने के अधिकार से सीधे जुड़ा गंभीर तथ्य है।और नामांकन फॉर्म में इसकी जानकारी यह बोलकर न देना कि मैं केस का नंबर तो जनता हूं,पर मुझे फरार घोषित किया गया है यह नहीं जानता था , कैसे संभव है ।

संपत्तियों के मूल्यांकन में भारी अंतर और कथित गलत घोषणा विस्तृत साक्ष्य एवं परीक्षण का विषय है।

चुनाव के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस एवं कथित आरोपों का प्रभाव और प्रकृति साक्ष्य के आधार पर ही तय होगा, जिसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए कई तर्क उच्च न्यायालय में इस रूप में नहीं उठाए गए थे।

पाण्डेय पक्ष की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड श्री रितेश अग्रवाल एवं श्री देवाशीष तिवारी भी उपस्थित रहे।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात् सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनका समुचित न्यायिक परीक्षण आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि इस चरण पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
इस प्रकार विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है।

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