रायपुर। माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा आघात लगा है। कुख्यात नक्सली नेता और हिड़मा का उत्तराधिकारी माने जाने वाले बरसे देवा ने शनिवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शिवधर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ 48 अन्य नक्सलियों ने भी हथियार डाल दिए।

कौन था बरसे देवा?
- हिड़मा का उत्तराधिकारी: नक्सली नेता हिड़मा की मौत के बाद माओवादी संगठन ने बरसे देवा को उसकी जगह जिम्मेदारी सौंपी थी।
- PLGA बटालियन का बिखराव: देवा और उसके प्रमुख साथियों के सरेंडर के साथ ही माओवादियों की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन पूरी तरह कमजोर हो गई है।
- हथियारों की सप्लाई का मास्टरमाइंड: पुलिस के अनुसार, संगठन के लिए आधुनिक हथियार जुटाने और उनकी आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने में देवा की अहम भूमिका थी।
डीजीपी ने क्या कहा?
तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिए जाएंगे। तत्काल सहायता के रूप में प्रत्येक को 25,000 रुपये का चेक सौंपा गया है। साथ ही, जिन पर इनाम घोषित था, उन्हें नियमानुसार इनामी राशि भी प्रदान की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आत्मसमर्पण?
बरसे देवा का सरेंडर छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा पर सक्रिय नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हिड़मा के बाद देवा ही सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। एक साथ पूरी बटालियन के आत्मसमर्पण से इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के लगभग खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।