नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और जिम्मेदारी तय करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कार चालक पीछे से आ रहे ट्रैफिक को देखे बिना अचानक दरवाजा खोलता है और उससे कोई दुर्घटना होती है, तो इसे सीधे तौर पर चालक की लापरवाही माना जाएगा।
न्यायमूर्ति अनीस दयाल की पीठ ने एक मोटर दुर्घटना मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सड़क पर खड़े वाहन का दरवाजा खोलते समय यह चालक का कर्तव्य है कि वह पीछे से आ रहे वाहनों की स्थिति का आकलन करे। बिना सावधानी के दरवाजा खोलना न केवल खतरनाक है, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के जीवन को भी जोखिम में डालता है।
हादसे का विवरण
मामले के अनुसार, यह दुर्घटना 20 अगस्त 2024 को दिल्ली के बुराड़ी इलाके में हुई थी। एक युवक अपनी बाइक से जा रहा था, तभी आगे खड़ी एक कार के चालक ने अचानक दरवाजा खोल दिया। बाइक सीधे दरवाजे से टकरा गई, जिससे युवक को सिर में गंभीर चोटें आईं और उसके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए। युवक को करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
पीड़ित को 90 प्रतिशत विकलांगता
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित को 90 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का शिकार माना। हादसे के कारण युवक को ट्रॉमैटिक पैराप्लेजिया हो गया, जिससे उसके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। पेशे से ट्यूटर रहा यह युवक अब अपने दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर है।
बीमा कंपनी की दलील खारिज
बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि बाइक सवार भी इस हादसे के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार था क्योंकि वह कार के बहुत करीब चल रहा था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति अनीस दयाल ने कहा कि भले ही सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन बिना पीछे देखे अचानक दरवाजा खोलना प्राथमिक लापरवाही है। कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए चालक की पूर्ण जिम्मेदारी तय की है।