छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों पर संकट, बीते तीन सालों में 9 बाघ और 38 हाथियों की हुई मौत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। विधानसभा में वन मंत्री केदार कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में बीते तीन सालों के दौरान 9 बाघों और 38 हाथियों की मृत्यु हुई है। इसके अलावा 562 अन्य वन्यजीवों की भी अस्वाभाविक मौत के मामले दर्ज किए गए हैं।

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में वन मंत्री ने यह विस्तृत जानकारी दी। आंकड़ों के अनुसार, हाथियों की मौत के मामलों में वर्ष 2024 में 18 और वर्ष 2025 में 16 हाथियों की जान गई है। वर्ष 2026 में अब तक 2 हाथियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। ये मौतें रायगढ़, धरमजयगढ़, कोरबा, बलरामपुर, सूरजपुर, बिलासपुर, धमतरी, सरगुजा एलीफेंट रिजर्व और उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व सहित विभिन्न वन मंडलों में हुई हैं।

बाघों की मौत को लेकर मंत्री ने बताया कि बीते दो वर्षों में कुल 9 बाघों ने दम तोड़ा है। वर्ष 2024 में सारंगढ़-बिलाईगढ़ और कोरिया में एक-एक बाघ की मृत्यु हुई। वहीं, वर्ष 2025 में अचानकमार टाइगर रिजर्व, नंदनवन सफारी, अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व और सूरजपुर में कुल 6 बाघों की मौत हुई। वर्ष 2026 में अब तक अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बाघ की मृत्यु का मामला सामने आया है।

वन मंत्री द्वारा पेश किए गए इन आंकड़ों ने राज्य के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके संरक्षण के उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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