रायगढ़। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो ने रायगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पूर्व में कार्यरत प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने के आदेश जारी किए हैं। वर्तमान में मुकेश त्रिपाठी रायपुर स्थित एसीबी कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। यह आदेश मंजू अग्रवाल द्वारा पांच साल पहले दायर किए गए एक परिवाद पत्र पर सुनवाई के बाद आया है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 3 नवंबर 2020 को परिवादिनी मंजू अग्रवाल कोतरा रोड स्थित सावित्री नगर में मुकेश त्रिपाठी के घर अपने पति को बुलाने गई थीं। आरोप है कि इसी दौरान प्रधान आरक्षक और उनकी पत्नी ने उनके साथ अश्लील गाली-गलौज की और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए जान से मारने की धमकी दी। परिवादिनी का आरोप है कि घटना के बाद मुकेश त्रिपाठी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उल्टे पीड़िता के खिलाफ ही सिटी कोतवाली में मामला दर्ज करा दिया और उसे प्रताड़ित करना जारी रखा।
पीड़िता ने उसी दिन सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अधिवक्ता सिराजुद्दीन के माध्यम से पैरवी करते हुए पीड़िता ने पांच वर्षों तक न्याय की गुहार लगाई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी दंपति के खिलाफ धारा 294, 506, 500 और 511 सहपठित धारा 34 के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोपियों को 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया है। यह मामला प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा अधिकारों के कथित दुरुपयोग और आम जनता के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर सवाल खड़े करता है।