रायपुर। सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा कांग्रेस को कई हिस्सों में बंटा हुआ बताने के बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी खुद अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। तंज कसते हुए बैज ने कहा कि बृजमोहन अग्रवाल का भी पार्टी के भीतर अलग गुट है और बीजेपी की हालत ऐसी है कि “इतने टुकड़े हो चुके हैं कि एक कोना भी कम पड़ जाएगा।”
दरअसल, छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रहे असमंजस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि सोनिया गांधी की कांग्रेस अलग है, राहुल गांधी की अलग, प्रियंका गांधी की अलग, खड़गे की अलग और टीएस सिंहदेव की अलग कांग्रेस है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया था कि पहले यह तय किया जाए कि आखिर कौन-सी कांग्रेस क्या फैसला लेगी।
इस बयान के जवाब में दिल्ली से कांग्रेस की अहम बैठक में शामिल होकर रायपुर लौटे पीसीसी चीफ दीपक बैज ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन एकजुट है, जबकि बीजेपी भीतर ही भीतर कई गुटों में बंटी हुई है।
बैठक की जानकारी देते हुए दीपक बैज ने बताया कि संगठन महामंत्री के.सी. वेणुगोपाल ने 13 राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान संगठन सृजन, जिला व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति, कार्यकारिणी गठन और मनरेगा बचाव जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा SIR को लेकर व्यक्तिगत स्तर पर भी चर्चा की गई।
बैज ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची से नाम काटे जाने को लेकर बीजेपी नेताओं द्वारा 400 से 500 फॉर्म जमा किए गए हैं। इस मामले में निगरानी के लिए विशेष टीम गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के गठन को लेकर समय-सीमा तय की गई है, जिसके तहत 31 मार्च तक और एक महीने के भीतर प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर के बयान पर दीपक बैज ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि वे इस विषय पर कुछ भी कहना नहीं चाहते। गौरतलब है कि अजय चंद्राकर ने दावा किया था कि दीपक बैज दोबारा पीसीसी अध्यक्ष नहीं बनेंगे।
वहीं धान खरीदी के मुद्दे पर कांग्रेस की मांग दोहराते हुए बैज ने कहा कि खरीदी की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले ही यह मांग उठा चुकी है, लेकिन सरकार की मंशा धान खरीदी को लेकर स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है।