EVM Battery Controversy : भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की कार्यप्रणाली और उसकी बैटरी बैकअप को लेकर शुरू हुआ विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक जा पहुंचा है। ईवीएम की बैटरी 99 फीसदी चार्ज दिखाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब 23 जुलाई को विस्तार से सुनवाई की जाएगी।
क्या है पूरा विवाद?
कांग्रेस का मुख्य आरोप ईवीएम की बैटरी लाइफ को लेकर है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि चुनाव के बाद मशीनों को करीब 15 दिनों तक स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बावजूद मतगणना के दिन कई मशीनों की बैटरी 99 प्रतिशत चार्ज मिली। कांग्रेस का सवाल है कि इतने दिनों तक बंद रहने और इस्तेमाल होने के बाद बैटरी फुल चार्ज कैसे रह सकती है?
चुनाव नतीजों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का दावा है कि मतदान के आंकड़ों में एक अजीब पैटर्न देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि जिन बूथों पर मशीनों की बैटरी 99 फीसदी चार्ज दिखाई दे रही थी, वहां कांग्रेस की हार हुई है। वहीं, जिन मशीनों में बैटरी 60 से 70 फीसदी के आसपास थी, वहां कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस इसे चुनावी गड़बड़ी और डेटा के साथ छेड़छाड़ का संकेत मान रही है।
लोकतंत्र और निष्पक्षता की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 23 मार्च को नोटिस जारी किया था। अब कांग्रेस की मांग है कि ईवीएम के साथ निकलने वाली पर्ची (VVPAT) की पूरी गणना की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। याचिका में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए उन्हें निरस्त करने की भी गुहार लगाई गई है। अब सभी की नजरें 23 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां चुनाव आयोग को भी अपना पक्ष रखना पड़ सकता है।