भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य का विवादित बयान: ‘हम दो हमारे चार’ का दिया नारा, बोले- रिश्ते बचाने को बच्चे जरूरी

अजमेर/जयपुर। अपने बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले बयानों के लिए मशहूर जयपुर की हवामहल सीट से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य एक बार फिर चर्चा में हैं। अजमेर के हनुमान धाम में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनसंख्या के मुद्दे पर समाज को ऐसी सलाह दी, जिससे नई बहस छिड़ गई है।

क्या है मामला? (बैकग्राउंड) विधायक बालमुकुंद आचार्य जनसंख्या असंतुलन पर अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लिए ‘हम दो हमारा एक’ वाली सोच आने वाले समय में एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, अगर यही स्थिति रही तो देश में हिंदू अल्पसंख्यक बनकर रह जाएंगे और दूसरे समुदाय की आबादी बढ़ जाएगी। इसी दौरान उन्होंने नया नारा दिया— “हम दो हमारे दो-चार होने दो।”

तर्क: चीन का उदाहरण और रिश्तों का डर आमतौर पर बढ़ती आबादी को देश के लिए बोझ माना जाता है, लेकिन विधायक का नजरिया अलग था। उन्होंने चीन की तरक्की का उदाहरण देते हुए कहा कि ज्यादा आबादी के बावजूद चीन व्यापार में नंबर वन है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक बच्चे वाले परिवारों में रिश्ते खत्म हो रहे हैं। अगर इकलौता बच्चा नौकरी के लिए विदेश चला गया, तो बूढ़े माता-पिता का सहारा कौन बनेगा? उनके अनुसार, बड़ा परिवार होने पर ही बच्चे फौज, पुलिस और खेती जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में देश की सेवा कर सकेंगे।

युवाओं को सलाह: नौकरी छोड़ो, मालिक बनो विधायक ने युवाओं से केवल सरकारी नौकरी के पीछे न भागने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को खुद का काम शुरू करना चाहिए ताकि वे दूसरों को रोजगार दे सकें। उन्होंने ‘जॉब सीकर’ की जगह ‘जॉब प्रोवाइडर’ बनने पर जोर दिया।

क्या होगा असर? बालमुकुंद आचार्य का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जहां एक पक्ष इसे अपनी संस्कृति और संख्या बचाने की कोशिश मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे आज के दौर में अव्यवहारिक कह रहा है। बढ़ती महंगाई और कम होते संसाधनों के बीच ऐसे बयानों से राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाने की आशंका है। फिलहाल प्रशासन भी क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रख रहा है।

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