नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026: दिल्लीवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा मौजूदा अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार इस वर्ष चार नए अस्पतालों का निर्माण पूरा करने जा रही है। इन अस्पतालों में कुल 3200 से अधिक बेड्स उपलब्ध होंगे। निर्माण कार्य वर्तमान में 65 से 85 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है तथा फर्नीचर व्यवस्था एवं स्टाफ भर्ती की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
ये अस्पताल पश्चिमी दिल्ली के हस्तसाल, मादीपुर, ज्वालापुरी तथा बाहरी दिल्ली के सिरसपुर क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य वर्ष 2019-20 में शुरू हुआ था, लेकिन विभिन्न कारणों से प्रगति धीमी रही। अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अगले आठ महीनों के भीतर सभी अस्पतालों को चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अस्पतालों का विवरण
- सिरसपुर अस्पताल
कुल बेड्स: 1164
निर्माण शुरू: अगस्त 2020
वर्तमान प्रगति: 80 प्रतिशत
पूरा होने का लक्ष्य: जुलाई 2026 - मादीपुर अस्पताल
कुल बेड्स: 691
निर्माण शुरू: नवंबर 2020
वर्तमान प्रगति: 75 प्रतिशत
पूरा होने का लक्ष्य: जुलाई 2026 - हस्तसाल अस्पताल
कुल बेड्स: 691
निर्माण शुरू: जून 2021
वर्तमान प्रगति: 65 प्रतिशत
पूरा होने का लक्ष्य: सितंबर 2026 - ज्वालापुरी अस्पताल
कुल बेड्स: 691
निर्माण शुरू: अगस्त 2020
वर्तमान प्रगति: 75 प्रतिशत
पूरा होने का लक्ष्य: जुलाई 2026
लाभार्थी क्षेत्र
इन अस्पतालों के चालू होने से पश्चिमी दिल्ली में स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल पर मरीजों का दबाव काफी कम होगा। इसी तरह सिरसपुर अस्पताल के शुरू होने से बादली, बवाना, स्वरूप नगर, नंगली पूना, खेड़ा कलां सहित आसपास के इलाकों के निवासियों को सीधी राहत मिलेगी।
परियोजना में देरी पर कार्रवाई
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पूर्व सरकार इन अस्पतालों को पूरा नहीं कर सकी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
लागत में बढ़ोतरी
विभिन्न कारणों से परियोजनाएं लंबे समय तक लंबित रहने के कारण लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ज्वालापुरी अस्पताल का मूल टेंडर 269.5 करोड़ रुपये तथा मादीपुर अस्पताल का 269.7 करोड़ रुपये था, लेकिन अब दोनों अस्पतालों की अनुमानित लागत लगभग 472 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
सरकार का प्रयास है कि इन अस्पतालों के जल्द चालू होने से दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार हो तथा मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।