नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा चुनाव के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के निर्णय पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है, जो सीधे तौर पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस ने महिला आरक्षण कानून और परिसीमन को लेकर सरकार की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ पारित होने के बाद सरकार पिछले 30 महीनों से इस दिशा में चुप बैठी थी। अब चुनावी मौसम में ‘डबल क्रेडिट’ लेने के लिए अचानक विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार का ‘नैरेटिव मैनेजमेंट’ करार देते हुए कहा कि जब विदेशी नीति और राजनीतिक मोर्चों पर सरकार पिछड़ रही है, तब ध्यान भटकाने के लिए यह सत्र आयोजित किया जा रहा है। रमेश के अनुसार, इस कदम से छोटे राज्यों को नुकसान होने की भी संभावना है।
विपक्ष बनाएगा साझा रणनीति इस मुद्दे पर केंद्र को घेरने के लिए विपक्ष ने लामबंदी शुरू कर दी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी 16 अप्रैल से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों की बैठक बुलाएंगे। इसके पश्चात अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर साझा रणनीति तैयार की जाएगी। कांग्रेस का तर्क है कि जब बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार चरम पर है और आचार संहिता लागू है, तब सत्र बुलाने का एकतरफा फैसला लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।
तीन दिवसीय सत्र की संभावना सूत्रों के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की बैठक 16 अप्रैल से शुरू हो सकती है जो 18 अप्रैल तक चलने की उम्मीद है। इन तीन दिनों में प्रस्तावित कानूनों और महिला आरक्षण बिल में संशोधनों पर चर्चा की जा सकती है। कांग्रेस का कहना है कि पहले केवल महिला आरक्षण की बात कही गई थी, लेकिन अब स्पष्ट है कि सरकार विशेष सत्र के माध्यम से परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जुड़े बिल भी लाना चाहती है।
चुनावी मौसम में सरकार और विपक्ष के बीच यह नया टकराव और तेज होने की उम्मीद है। जहां सरकार महिला आरक्षण और अन्य विधेयकों को पारित करने को अपनी प्राथमिकता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पूरी तरह से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश मान रहा है।