कोरिया। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। शासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है।
Prohibition of Child Marriage Act के तहत 21 वर्ष से कम आयु के लड़के एवं 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह अपराध है।
बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, अभिभावक या अन्य रिश्तेदारों को 2 वर्ष तक का कारावास एवं 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड हो सकते हैं।
विवाह संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी, पादरी तथा सहयोग देने वाले नाई, हलवाई, बैंड संचालक या अन्य व्यक्ति भी दंड के भागीदार होंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले के विभिन्न ग्राम क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। काउंसलर श्रीमती पुष्पा सिंह, स्वाति गोयल एवं किरण चौधरी द्वारा ग्रामीण एवं अशिक्षित नागरिकों को घर-घर जाकर बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।
इस अभियान में जिला समन्वयक श्री गौरी शंकर जी महिला सशक्तिकरण की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उनके मार्गदर्शन, समन्वय एवं सतत प्रयासों से कार्यक्रम को जिला स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया गया और विभिन्न ग्रामों में प्रभावी जनसंपर्क स्थापित हुआ।अभियान के अंतर्गत शिशपाल क्षेत्र से जागरूकता रथ थाना पटना पहुंचा, जहां से थाना प्रभारी प्रमोद पांडे, विधायक प्रतिनिधि अंशु देवांगन, एवं अन्य पुलिस कर्मियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता दयाल शुक्ला तथा गणमान्य नागरिकों द्वारा रात्रि में रैली को रवाना किया गया। इस संयुक्त पहल से यह संदेश दिया गया कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि एवं समाज मिलकर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बाल विवाह की सूचना तुरंत निकटतम थाना या संबंधित विभाग को दें।
बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दें।
बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
बाल विवाह रोकें — बेटियों और बेटों का भविष्य संवारें।
छत्तीसगढ़ बने बाल विवाह मुक्त राज्य।