बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाले बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच आज इस मामले में अंतिम सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद फिर से खुले इस केस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
CBI की 11,000 पन्नों की चार्जशीट और अमित जोगी
बता दें कि इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीबीआई ने कोर्ट में 11,000 पन्नों की विशाल जांच रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी के खिलाफ भी गंभीर आरोप तय किए गए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया था कि 1 अप्रैल से इस मामले की अंतिम जिरह शुरू हो जाएगी।
हाईकोर्ट का सख्त रुख: समय देने से किया साफ इनकार
दरअसल, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में माहौल काफी गरमाया रहा। अमित जोगी के वकील ने कोर्ट से दलील दी कि उन्हें केस की पूरी फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसलिए जवाब तैयार करने के लिए कुछ और समय दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीधे निर्देश: ‘अभी के अभी उपलब्ध कराएं फाइल’
मैदानी सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने सीबीआई के वकील को कड़े निर्देश दिए हैं कि बचाव पक्ष को तुरंत फाइल की कॉपी दी जाए ताकि आज की अंतिम सुनवाई में कोई बाधा न आए। इस सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी, सीबीआई और राज्य सरकार के वकील भी मौजूद रहे।
क्या है रामावतार जग्गी हत्याकांड?
गौरतलब है कि साल 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने तत्कालीन जोगी सरकार की चूलें हिला दी थीं। दशकों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब यह मामला अपने अंतिम पड़ाव पर है। आज की सुनवाई के बाद यह तय हो सकता है कि इस मामले में फैसला कब सुनाया जाएगा या आगे क्या कार्रवाई होगी।