रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन से दो बार वॉकआउट किया। सड़क निर्माण और बजट में वित्तीय स्वीकृति को लेकर वित्त मंत्री ओपी चौधरी के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर जाने का रास्ता चुना।
विधानसभा में विधायक संगीता सिन्हा ने संजारी-बालोद क्षेत्र के अंतर्गत बीते तीन वित्तीय वर्षों के बजट में शामिल कार्यों की वित्तीय स्वीकृति का मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि 3 फरवरी 2026 की स्थिति में कितने कार्यों को राशि स्वीकृत की गई है और कितने प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित हैं।
सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक के बजट कार्यों की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में दे दी गई है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि कार्यों में गति लाने के लिए विभागों के प्रशासकीय स्वीकृति के अधिकार 3 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि 3 फरवरी 2026 की स्थिति में संजारी-बालोद क्षेत्र का कोई भी प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित नहीं है।
चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वीकृति की घोषणा करने की बात कही, जिस पर वित्त मंत्री ने इसे विभागीय प्रक्रिया बताते हुए सदन में घोषणा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के क्षेत्रों में काम नहीं करना चाहती। इसी विरोध में विपक्ष ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया।