छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र 2026: रोवर-रेंजर जंबूरी के टेंडर पर घमासान, विपक्ष ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप…

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान रोवर-रेंजर जंबूरी के टेंडर को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। बालोद में आयोजित कार्यक्रम के निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने सरकार को घेरा और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

विधायक उमेश पटेल ने इस विषय पर प्रश्न उठाते हुए पूछा कि बालोद में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर-रेंजर जंबूरी के लिए किन-किन कार्यों पर कितना खर्च किया गया और किस फर्म को कितनी राशि का टेंडर दिया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि टेंडर की शर्तें तय करने के लिए क्या कोई समिति गठित की गई थी और क्या टेंडर में किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाने की शिकायतें मिली हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने लिखित उत्तर में बताया कि जंबूरी आयोजन के तहत एरीना (क्रीड़ांगन) निर्माण, शौचालय, जल और प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, टेंट, कार्यक्रम डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय तथा प्रिंटिंग समेत अन्य कार्यों पर अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जंबूरी से जुड़े कार्यों के लिए मेसर्स अमर भारत किराया भंडार, रायपुर को 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर दिया गया था। मंत्री के अनुसार टेंडर की शर्तें तय करने के लिए समिति का गठन किया गया था और किसी भी फर्म को लाभ पहुंचाने के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

इसके बाद विधायक उमेश पटेल ने पूरक प्रश्न करते हुए पूछा कि जंबूरी के समय स्काउट-गाइड परिषद का राज्य अध्यक्ष कौन था। इस पर मंत्री यादव ने जवाब दिया कि भारत स्काउट एवं गाइड की नियमावली के अनुसार राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ही पदेन अध्यक्ष होते हैं।

विधायक पटेल ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जंबूरी स्थल पर निर्माण कार्य शुरू हो गया था और आधा ढांचा तैयार भी हो चुका था। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए सदन की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की। हालांकि मंत्री यादव ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि जब भ्रष्टाचार हुआ ही नहीं तो जांच का सवाल ही नहीं उठता।

इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि स्काउट-गाइड के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। बघेल ने आरोप लगाया कि जंबूरी कार्यक्रम से पहले टेंडर प्रक्रिया दो बार निकाली गई और जिस फर्म को टेंडर मिला, उसे पहले से इसकी जानकारी होने का संदेह है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह की स्थिति सुकमा में भी देखने को मिली थी और आचार संहिता के दौरान भी काम शुरू कर दिया गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सदन के माध्यम से सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जंबूरी स्थल पर बिना टेंडर के काम शुरू हुआ है तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष पद को लेकर कोई विवाद नहीं था और नियमों के अनुसार स्कूल शिक्षा मंत्री ही पदेन अध्यक्ष होते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा काम जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से किया गया है, जहां पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाती है और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। मंत्री ने दोहराया कि सभी कार्य नियमों के तहत हुए हैं, इसलिए जांच की आवश्यकता नहीं है।

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