बस्तर में बदलती तस्वीर 18 माओवादी कैडरों का सरेंडर, शांति और विकास की ओर बड़ा कदम

बीजापुर/
बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो के इंचार्ज पाप्पा राव सहित कुल 18 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस समूह में डीवीसीएम प्रकाश मड़वी, डीवीसीएम अनिल ताती समेत 7 महिला कैडर भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, सभी माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की है। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ये कैडर अपने पास मौजूद AK-47 राइफल सहित अन्य हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंपेंगे।


अधिकारियों का कहना है कि 24 मार्च 2026 को हुई यह घटना नक्सल-मुक्त बस्तर के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक उपलब्धि है। दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार ऐसा माना जा रहा है कि संगठन नेतृत्वविहीन होता नजर आ रहा है, जिससे नक्सल गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
प्रशासन और सरकार का मानना है कि यह आत्मसमर्पण क्षेत्र में शांति, विकास और स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर अब नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ आगे बढ़ने की ओर अग्रसर है।
सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि अभी भी छोटे-छोटे समूहों में सक्रिय बचे हुए माओवादी कैडर भी आने वाले समय में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी 18 कैडरों के औपचारिक पुनर्वास और पुनर्समावेशन की प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जाएगी। इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रशासन द्वारा शीघ्र साझा की जाएगी।

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