राजनांदगांव। शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार का संयोग बन रहा है, जिसके कारण माता रानी डोली पर सवार होकर आ रही हैं। शास्त्रों में डोली को सतर्कता और संघर्ष का प्रतीक माना गया है। वहीं, नवरात्रि के समापन पर माता का गमन हाथी पर होगा, जिसे अच्छी वर्षा, उत्तम कृषि और आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष 72 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसमें अमावस्या तिथि के साये में घट स्थापना की जाएगी। प्रतिपदा तिथि का क्षय होने के बावजूद नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। 19 मार्च को शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो प्रमुख समय निर्धारित किए गए हैं। पहला श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:02 बजे से 8:40 बजे तक है, जबकि दूसरा शुभ समय सुबह 9:16 बजे से 10:56 बजे तक रहेगा। जानकारों का कहना है कि इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पंडालों और सुरक्षा की तैयारियां
नवरात्रि पर्व को लेकर राजनांदगांव से डोंगरगढ़ तक के मार्ग पर सेवा पंडालों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रबंधन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भक्तों की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं जुटानी शुरू कर दी हैं। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भी बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था, रूट डायवर्जन और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं को लेकर कार्य योजना तैयार कर ली है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।