रायपुर। आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चैत्र नवरात्र की शुरुआत कल 19 मार्च से होने जा रही है। मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में माता के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूरे नियम और निष्ठा के साथ माता रानी को भोग और पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि अनजाने में कुछ ऐसी चीजों का प्रयोग पूजा में कर लिया जाता है, जिनसे बचना चाहिए ताकि साधना का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में कभी भी बासी या खराब भोजन का भोग नहीं लगाना चाहिए। देवी को सदैव ताजा, शुद्ध और सात्विक आहार ही प्रिय होता है। इसी प्रकार मुरझाए हुए या बासी फलों को अर्पित करने से भी परहेज करना चाहिए। यदि ताजे फल उपलब्ध न हों, तो शुद्धता से तैयार किया गया सात्विक भोजन या चावल अर्पित किया जा सकता है।
फूलों के चयन में भी विशेष सावधानी आवश्यक है। पूजा में हमेशा ताजे और सुगंधित फूलों का ही प्रयोग करना चाहिए। सूखे या मुरझाए हुए फूल चढ़ाना अशुभ माना जाता है। विशेष रूप से धतूरा, मदार और कनेर के फूलों को मां दुर्गा की पूजा में वर्जित माना गया है, इसलिए इन पुष्पों को अर्पित करने से बचना चाहिए।
एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि देवी पूजन में तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं किया जाता है। चूंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए शक्ति की उपासना में इनका निषेध बताया गया है। मान्यता है कि वर्जित वस्तुओं को अर्पित करने से पूजा में व्यवधान उत्पन्न होता है, अतः श्रद्धालुओं को इन छोटी मगर जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।