आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है और पूरा माहौल मां कुष्मांडा की भक्ति में डूबा हुआ है। अगर आप भी अपनी बुद्धि की ‘बैटरी’ फुल करना चाहते हैं और करियर की बाधाओं को ‘डिलीट’ करना चाहते हैं, तो आज का दिन आपके लिए बेहद खास है। शास्त्रों के अनुसार, जब दुनिया में अंधेरा था, तब मां ने अपनी हल्की सी मुस्कान से इस पूरे ब्रह्मांड को जन्म दिया था।
कैसा है मां का स्वरूप?
मां कुष्मांडा को ‘अष्टभुजा’ देवी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं। शेर पर सवार माता का यह रूप इतना तेजस्वी है कि ये सूर्य के घेरे में भी निवास कर सकती हैं।
पूजा की ‘सिंपल’ और सटीक विधि
शुद्धिकरण: सुबह जल्दी नहाकर साफ (संभव हो तो पीले) कपड़े पहनें।
स्थापना: मंदिर में गंगाजल छिड़कें और चौकी पर मां की फोटो रखें।
श्रृंगार और भोग: मां को पीले फूल, फल और धूप-दीप अर्पित करें।
स्पेशल टिप: मां कुष्मांडा को कुम्हड़े (पेठा) की बलि या पेठे की मिठाई बहुत प्रिय है, इससे वे जल्दी प्रसन्न होती हैं।
आज का मंत्र और भोग
मंत्र: ऊं कुष्माण्डायै नम: (इस मंत्र का जाप आपके मानसिक तनाव को कम करेगा)।
भोग: आज मां को मालपुए का भोग लगाएं। मान्यता है कि इससे दान देने की शक्ति और बुद्धि बढ़ती है।
आरती की मुख्य पंक्तियां
“कुष्मांडा जय जग सुखदानी, मुझ पर दया करो महारानी।”
“तेरे दर पर किया है डेरा, दूर करो मां संकट मेरा।”