चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन आज शक्ति के रौद्र रूप ‘मां कालरात्रि’ की पूजा की जा रही है। देवी का यह स्वरूप देखने में जितना भयानक है, अपने भक्तों के लिए उतना ही शुभ फल देने वाला है, इसीलिए इन्हें ‘शुभंकारी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि कालरात्रि की पूजा से भूत-प्रेत, भय और शत्रुओं का नाश होता है।
पूजा की सरल विधि
आज सुबह जल्दी स्नान के बाद नीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़क कर मां की तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। मां को लाल फूल, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। पूजा के अंत में मां की आरती करें और गुड़ का भोग लगाएं।
मंत्रों का जाप
मां को प्रसन्न करने के लिए आप इस सरल बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं:
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः॥”
क्यों चढ़ाते हैं गुड़ का भोग?
मां कालरात्रि को गुड़ बहुत प्रिय है। आज के दिन मां को गुड़ या उससे बनी मिठाइयों का भोग लगाने से मानसिक शांति मिलती है और परिवार के संकट दूर होते हैं।
रंग और महत्व
नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग (Royal Blue) पहनना श्रेष्ठ माना गया है। यह रंग अटूट विश्वास और शक्ति का प्रतीक है, जो साधक को निडर बनने की प्रेरणा देता है।
पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, जब असुर रक्तबीज के आतंक से देवलोक कांप उठा था, तब मां पार्वती ने कालरात्रि का रूप लिया। रक्तबीज को वरदान था कि उसके खून की हर बूंद से नया राक्षस पैदा होगा। मां कालरात्रि ने युद्ध के दौरान उसका वध किया और उसके रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया, जिससे अधर्म का अंत हुआ।