चैत्र महा नवमी 2026 : मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन, जानें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि

रायपुर। चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन उत्सव का आज नौवां और अंतिम दिन है, जिसे पूरा देश और विशेषकर छत्तीसगढ़ का जनमानस महा नवमी के रूप में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मना रहा है। आज का दिन आदि शक्ति के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पिछले आठ दिनों की कठिन तपस्या और साधना का संपूर्ण फल आज मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्राप्त होता है। मंदिरों की घंटियों की गूंज और घर-घर में हो रहे हवन-पूजन से आज सुबह से ही वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महिमा

देवी सिद्धिदात्री को समस्त सिद्धियों की दात्री कहा जाता है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान शिव ने भी इन्हीं की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके कारण उनका आधा शरीर देवी का हो गया था और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए थे। मां का स्वरूप अत्यंत सौम्य और तेजस्वी है। वे सिंह की सवारी करती हैं और कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। उनके चार हाथों में गदा, चक्र, शंख और कमल का पुष्प सुशोभित है, जो शक्ति, ज्ञान और शांति का प्रतीक है।

पूजा के विशेष शुभ मुहूर्त

आज महा नवमी पर ग्रहों की स्थिति अत्यंत शुभ बनी हुई है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जो भक्त शुभ समय में माता की आराधना करेंगे, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होगी:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 से 05:30 तक (साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
  • प्रातः संध्या: सुबह 05:07 से 06:17 तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:51 तक (किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम)।
  • सायं संध्या: शाम 06:36 से 07:46 तक।

संपूर्ण पूजन विधि और परंपरा

आज के दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पश्चात स्वच्छ और विशेषकर बैंगनी रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए, क्योंकि यह रंग मां सिद्धिदात्री को अत्यंत प्रिय है। सबसे पहले घर के मंदिर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें और मां की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद माता को कुमकुम, अक्षत, पीले फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते हुए मां की कथा सुनें।

कन्या पूजन और महाप्रसाद

महा नवमी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष ‘कन्या पूजन’ है। आज घर-घर में नौ छोटी कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे जा रहे हैं। कन्याओं को आदरपूर्वक आसन पर बैठाकर उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का महाप्रसाद खिलाया जा रहा है। भोजन के उपरांत उन्हें लाल चुनरी, उपहार और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि की पूजा अधूरी रहती है। शाम को हवन और आरती के साथ नौ दिनों के इस महान अनुष्ठान की पूर्णाहूति दी जाएगी।

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