गरियाबंद व्याख्याताओं को आईआईएसईआर पुणे में मिला छात्र-केंद्रित पेडागॉजी का प्रशिक्षण

गरियाबंद । राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला में जिले के पाँच शिक्षक शामिल हुए। प्रशिक्षण में शामिल हुई व्याख्याता समीक्षा गायकवाड़ ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक के शिक्षकों को आधुनिक विज्ञान एवं गणित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना था। तीन संभागों के हर जिले के प्रत्येक विकासखंड से एक व्याख्याता का चयन किया गया।


यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य स्तर से आयुक्त किरण कौशल (IAS), उपसंचालक ए.के. सारस्वत, सहायक संचालक मंजूलता साहू, ए.पी.सी. राजेश सोनकर एवं जिला स्तर पर कलेक्टर भगवान सिंह उइके, जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर तथा जिला मिशन समन्वयक शिवेश शुक्ला के निर्देशन एवं समग्र शिक्षा गरियाबंद एपीसी विल्सन पी थॉमस के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक से समीक्षा गायकवाड़, शास रामबिशाल पाण्डेय उत्कृष्ट अंग्रेजी वि. राजिम, मैनपुर से अभय राम कश्यप, शास उ.मा.वि.झारगाँव, गरियाबंद से राखी पटेल, शास उ.मा.वि. नागाबुड़ा, देवभोग से पुष्पक सिंह चौधरी, शास उ.मा.वि. बाड़ीगाँव, फिंगेश्वर से मिनाक्षी शर्मा, शास उ.मा.वि. कौन्दकेरा व्याख्याताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को संस्थान के साइंस सेंटर, प्रयोगशालाओं का अवलोकन कराया गया। वैज्ञानिक तथ्यों और सिद्धांतों को सरल, रोचक और कम लागत वाले व्यवहारिक प्रयोगों की जानकारी दी गई, जिससे प्रभावी शिक्षण-अधिगम सामग्री निर्माण की समझ विकसित हुई। तारामंडल भ्रमण और खगोलीय पिंडों के अवलोकन ने अनुभव को और समृद्ध किया।वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद से शिक्षकों को अनुसंधान आधारित सोच विकसित करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण में एक्टिव लर्निंग, एक्टिविटी-बेस्ड टीचिंग और स्टूडेंट-सेंट्रिक पेडागॉजी पर विशेष बल दिया गया। विज्ञान को तथ्यों के संग्रह के बजाय एक सतत प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने की अवधारणा पर जोर दिया गया। कार्यशाला में नेक्स्ट जनरेशन साइंस स्टैंडर्ड्स (NGSS) की संकल्पना, उद्देश्य और कक्षा में उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। गणित शिक्षण में क्षेत्रफल, आयतन और तार्किक चिंतन जैसे विषयों को दैनिक जीवन के उदाहरणों से सरल बनाने की विधियाँ सिखाई गईं। वहीं विज्ञान में ध्वनि, प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, तरंगदैर्ध्य, गति, स्थानांतरण और अनुनाद जैसे जटिल विषयों को गतिविधि व प्रयोग आधारित तरीकों से समझाया गया। पर्यावरण एवं जीव-जगत से जुड़ाव हेतु विशेष सत्र में प्राकृतिक आवास, भोजन, प्रजनन, संरक्षण और जीवन चक्र पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने बताया कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें विज्ञान को सरल, रोचक और अनुभवात्मक ढंग से पढ़ाने की नई समझ दी। प्रशिक्षण के पश्चात वे अपने विद्यालयों में नवाचार आधारित गतिविधियाँ संचालित करेंगे, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा को प्रोत्साहन मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *