नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी का इंतजार बढ़ गया है। हाल ही में संपन्न हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण वर्तमान में डीए 58 प्रतिशत पर ही स्थिर बना हुआ है।
आमतौर पर जनवरी से प्रभावी होने वाले महंगाई भत्ते की घोषणा मार्च के अंत तक कर दी जाती है, लेकिन इस वर्ष अप्रैल का समय बीतने के बाद भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारों के अनुसार, यह विलंब किसी नीतिगत बदलाव के कारण नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की वजह से हो रहा है। डीए का आंकड़ा अब 60 प्रतिशत के करीब पहुंच रहा है, जिसके चलते सरकार वित्तीय आकलन बहुत बारीकी से कर रही है। इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले 8वें वेतन आयोग के प्रस्तावित बदलावों के साथ डीए का तालमेल बिठाना भी देरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बाजार और सोशल मीडिया पर डीए फ्रीज होने की अटकलों के बीच विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। महंगाई भत्ता उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीआईडब्ल्यू) के आधार पर तय होता है और यह वेतन का एक अनिवार्य हिस्सा है। अनुमान है कि डीए में 2 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जिससे यह 58 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। 60 प्रतिशत का स्तर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद डीए को मूल वेतन में विलय करने की चर्चाएं शुरू हो सकती हैं।
फिलहाल कर्मचारियों को जनवरी 2026 से एरियर के साथ इस बढ़ोतरी का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि घोषणा में देरी से अल्पकालिक आर्थिक दबाव महसूस किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में मिलने वाले एकमुश्त बकाया से राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट आवंटन और वेतन आयोग की तैयारियों को देखते हुए सरकार जल्द ही इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर सकती है।
