नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की अगली जनगणना (Census 2027) के लिए औपचारिक बिगुल फूंक दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस महा-अभियान का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। कोरोना के कारण लंबे समय से रुकी यह प्रक्रिया अब पूरी तरह नए और हाई-टेक अवतार में नजर आएगी।
स्मार्टफोन पर दर्ज होगा देश का भविष्य
आजाद भारत के इतिहास में पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल होने जा रही है। अब सरकारी कर्मचारी कागज के बंडल लेकर नहीं, बल्कि स्मार्टफोन और टैबलेट लेकर आपके घर आएंगे। डेटा संग्रह के लिए एंड्रॉइड और आईओएस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष ‘सीएमएमएस’ (CMMS) पोर्टल बनाया गया है, जिससे डेटा में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
पहली बार शामिल होगा जातिगत डेटा
इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनसंख्या गिनती के दौरान जाति संबंधी जानकारी भी जुटाई जाएगी। स्वतंत्र भारत में यह पहली बार होगा जब जनगणना में जातिगत आंकड़े शामिल किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने ₹11,718 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।
आम जनता के लिए ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ की सुविधा
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प दिया है। लोग घर-घर सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुद पोर्टल या ऐप पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। लगभग 30 लाख जमीनी कर्मचारी (मुख्य रूप से सरकारी शिक्षक) इस विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यास को पूरा करने के लिए मैदान में उतरेंगे।
सटीक डेटा से बनेगी बेहतर नीतियां
सरकार ‘CaaS’ (Census-based Service) मॉडल के जरिए मंत्रालयों को मशीन-पठनीय डेटा उपलब्ध कराएगी। इससे भविष्य में बनने वाली सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।