वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष पर फिलहाल विराम लग गया है। दोनों देश 14 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के लिए सहमत हो गए हैं। इस समझौते के तहत ईरान अपनी शर्तों पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने को तैयार हो गया है। व्हाइट हाउस ने इस सैन्य अभियान को अमेरिकी जीत बताते हुए कहा कि कूटनीतिक बातचीत का रास्ता सैन्य दबाव के कारण ही संभव हो पाया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप का रुख इस महत्वपूर्ण समझौते में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते से कुछ समय पहले ईरान को बुनियादी ढांचे तबाह करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अंतिम घंटों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व के हस्तक्षेप से यह डील सफल रही। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस सहयोग के लिए पाकिस्तान का आभार भी व्यक्त किया। आगामी 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक शांति वार्ता आयोजित की जाएगी।
ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान पर हमले पूरी तरह रुक जाते हैं, तो उनकी सेना रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देगी। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 10 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसमें मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और पहुंचाए गए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग। क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों से अमेरिकी सेना की वापसी और भविष्य में हमले न करने की लिखित गारंटी। यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पुराने प्रस्तावों को समाप्त करना। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रखना। लेबनान में हिजबुल्लाह सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति।
समझौते पर प्रतिक्रिया राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को बातचीत शुरू करने के लिए एक व्यावहारिक आधार बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दो सप्ताह के युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा की। दूसरी ओर, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी समझौते की पुष्टि की है और इसे अपनी कूटनीतिक जीत करार दिया है। समझौते के अनुसार, अगले दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही ईरान की सेना के समन्वय के साथ सुरक्षित रूप से संचालित की जाएगी।