बिलासपुर। प्रदेश में नेशनल हाईवे और अन्य सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े से होने वाले हादसों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर से जांजगीर तक सड़कों पर मवेशियों की तस्वीरें पेश करते हुए दायर जनहित याचिका में एनएचएआई पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित न करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया कि अगर सड़क सुरक्षित नहीं है तो टोल टैक्स वसूलना गलत है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि सड़क पर मवेशियों के बैठने के लिए आम लोग भी जिम्मेदार हैं। साथ ही राज्य सरकार से नए मुख्य सचिव की शपथपत्र के साथ सड़क से मवेशियों को हटाने का रोडमैप मांगा गया है।
बिलासपुर कलेक्टर ने शपथपत्र में जुलाई से सितंबर तक तीन हादसों में 39 मवेशियों की मौत का आंकड़ा प्रस्तुत किया। संवेदनशील स्थानों पर सोलर लाइट और इंडिकेटर बोर्ड लगाए गए हैं। ग्राम सभाओं में आवारा पशु प्रबंधन को अनिवार्य एजेंडा बनाया गया है।
साथ ही घायल मवेशियों के लिए टोल-फ्री नंबर 1962, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां, गौ-अभयारण्य और गौधाम स्थापित किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से दो हफ्ते में व्यक्तिगत शपथपत्र देने का आदेश दिया है।