नई दिल्ली। भारत में सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचकर ₹1.6 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू रही हैं, जिससे आम आदमी के लिए जेवर खरीदना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $5,000 और चांदी के $100 के करीब पहुंचने के पीछे वैश्विक तनाव, रुपये की कमजोरी और ‘ग्रीनलैंड विवाद’ जैसे कारणों को जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से मध्यम वर्ग और ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें हैं।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि सोने पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को तार्किक बनाया जाए ताकि घरेलू कीमतों में कमी आए। इसके साथ ही, ‘ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल’ (GJC) ने ज्वेलरी पर लगने वाले GST को 3% से घटाकर 1.25% या 1.5% करने की अपील की है। जानकारों का मानना है कि यदि टैक्स के ढांचे में सुधार होता है, तो मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में सोने की मांग बढ़ेगी, जिससे रिटेल कारोबार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
निवेश के मोर्चे पर, साल 2024 से बंद पड़ी ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड’ (SGB) स्कीम को दोबारा शुरू करने की पुरजोर वकालत की जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि SGB न केवल सुरक्षित निवेश है, बल्कि यह भौतिक सोने की मांग को कम कर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। अब सभी की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी हैं कि क्या बजट 2026 सोने की चमक को आम आदमी की जेब के अनुकूल बना पाएगा।