ब्लू माउंटेंस और नीलेपन का जादू

ऑस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्र

सिडनी की हलचल और समुद्री चमक से निकलकर जब ट्रेन पश्चिम की ओर बढ़ती है, तो शहर धीरे-धीरे पीछे छूटने लगता है। इमारतों की जगह पेड़ लेने लगते हैं, हवा में नम ठंडक घुलने लगती है और मन अनायास ही किसी पुराने, शांत संसार की ओर खिंच जाता है। यही यात्रा मुझे न्यू साउथ वेल्स के उस पर्वतीय क्षेत्र तक ले गई, जिसे दुनिया ब्लू माउंटेन्स के नाम से जानती है।

पहली ही झलक में यह नाम अपना रहस्य खोल देता है। दूर-दूर तक फैले घने यूकेलिप्टस के जंगलों से उठती नीली-सी धुंध पहाड़ियों को जैसे किसी स्वप्नलोक में बदल देती है। धूप जब इन पेड़ों से निकलने वाले तेल के महीन कणों से टकराती है, तो पूरी घाटियाँ नीले आवरण में लिपट जाती हैं। यह नीला रंग आँखों से ज़्यादा मन पर असर करता है । एक ऐसी शांति देता है, जो शहरों में दुर्लभ है।

यहाँ की पहाड़ियाँ दरअसल ऊँचा पठार हैं, जिन्हें समय ने तराश-तराश कर गहरी घाटियों, खाइयों और सीधी खड़ी चट्टानों का रूप दे दिया है। ग्रेट डिवाइडिंग रेंज का यह हिस्सा प्रकृति की धीमी लेकिन अडिग कला का जीवंत उदाहरण है। घाटियों के बीच बहती नदियाँ और दूर-दूर तक फैली हरियाली यह एहसास दिलाती है कि धरती यहाँ बहुत पुराने ढंग से साँस लेती है।

कैटूम्बा के पास पहुँचना इस यात्रा का एक खास पड़ाव था। यहीं से थ्री सिस्टर्स दिखाई देती हैं । तीन सीधी, खामोश चट्टानें, जो घाटी के ऊपर खड़ी किसी प्राचीन कथा की तरह प्रतीत होती हैं। स्थानीय आदिवासी मान्यता के अनुसार ये तीन बहनें थीं, जिन्हें एक जादूगर ने पत्थर में बदल दिया था। हवा के साथ आती उनकी कहानी सिर्फ कानों से नहीं, भीतर तक उतरती है। सूर्यास्त के समय जब इन चट्टानों पर बदलते रंग पड़ते हैं, तो लगता है मानो वे अभी बोल उठेंगी।

सन् दो हज़ार में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जाना इस क्षेत्र की वैश्विक अहमियत को रेखांकित करता है। यहाँ यूकेलिप्टस की करीब नब्बे से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। चलते-चलते अलग-अलग गंधों का अनुभव होना, पत्तों की बनावट में फर्क देखना और पक्षियों की विविध आवाज़ें सुनना, इसे किसी खुले जीवित संग्रहालय जैसा बना देता है।

इस धरती का रिश्ता सिर्फ प्रकृति से नहीं, बल्कि इतिहास और आस्था से भी है। दारुग और गुंडुंगुरा समुदायों के लिए यह इलाका पीढ़ियों से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता आया है। चट्टानों पर बने शैल चित्र, गुफाओं के भीतर छिपी कथाएँ और धरती से जुड़ी उनकी स्मृतियाँ आज भी मौजूद हैं। इन निशानों के सामने खड़े होकर एहसास होता है कि हम यहाँ मेहमान हैं । अस्थायी, जबकि यह भूमि सदा से अपनी कहानियाँ सँजोए हुए है।

ब्लू माउंटेन्स में घूमना सिर्फ देखना नहीं, बल्कि चलना, रुकना और महसूस करना है। बुशवॉकिंग के रास्ते जंगल के भीतर ले जाते हैं, जहाँ हर मोड़ पर कोई झरना, कोई व्यू-पॉइंट या अचानक खुलती घाटी मिल जाती है। स्केनिक वर्ल्ड की केबल कार और रेलवे से नीचे उतरते हुए घाटियों की गहराई का अंदाज़ा होता है, और ऊपर से दिखती हरियाली किसी विशाल चित्र की तरह लगती है। कैमरा हाथ में हो या न हो, यह जगह अपने आप स्मृतियों में दर्ज हो जाती है।

मौसम भी यहाँ का एक अलग अनुभव है। गर्मियों में, जब ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्से तपते हैं, यहाँ की ठंडी और सुखद हवा राहत देती है। सर्दियों में कभी-कभी बर्फ की हल्की परत पहाड़ियों को ढक लेती है , जो इस देश में दुर्लभ दृश्य है और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के चेहरे पर मुस्कान ला देती है।

शाम ढलते-ढलते, जब नीली धुंध और गहरी हो जाती है और जंगलों से आती ठंडी हवा शरीर को छूती है, तब महसूस होता है कि ब्लू माउंटेन्स सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, एक मनःस्थिति है। यहाँ से लौटते समय मन में कोई जल्दबाज़ी नहीं होती , बस यही इच्छा रहती है कि इस नीले सन्नाटे का थोड़ा-सा अंश अपने साथ लेकर चला जाए, ताकि शहर की भीड़ में भी कभी-कभी वही शांति याद आ सके।

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