रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज संस्कृति और कला से संबंधित विभिन्न विषयों को लेकर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। सदन में उन्होंने संस्कृति विभाग और राजभाषा आयोग के अधिकारियों पर मनमानी करने और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए।
विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में संस्कृति और कला के नाम पर केवल आयोजन, जयंती समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर ठोस काम नदारद हैं। उन्होंने संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि राज्य की संस्कृति परिषद के अंतर्गत आने वाली नौ संस्थाओं और विभिन्न शोधपीठों ने पिछले छह वर्षों में क्या उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने इन संस्थाओं में हुई नियुक्तियों और उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों पर भी सवाल उठाए।
चर्चा के दौरान विधायक ने इस बात पर आपत्ति जताई कि प्रदेश में एक ही विषय पर काम करने वाली कई संस्थाएं सक्रिय हैं, जो संसाधनों का दुरुपयोग कर रही हैं। उन्होंने संस्कृति परिषद की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए सुझाव दिया कि सभी संस्थाओं को अलग-अलग किया जाना चाहिए या फिर विभाग की मूल भावना के अनुरूप काम न होने की स्थिति में इन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए।
अजय चंद्राकर ने फिल्म विकास निगम में छत्तीसगढ़ी भाषा के उल्लेख और राजपत्र में छपी विसंगतियों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि छत्तीसगढ़ी व्याकरण हिंदी से भी अधिक प्राचीन है, इसलिए इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार को ठोस और प्रभावी पहल करनी चाहिए। उन्होंने कुरूद विधानसभा में एमपी थिएटर निर्माण में हुई गड़बड़ियों और राज्य में अब तक अभिलेखागार (आर्काइव्स) न बन पाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ प्रदेश की 42 अन्य भाषाओं के मानकीकरण पर तेजी से कार्य चल रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाषा के विकास के बाद इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्रीय स्तर पर पूरा प्रयास किया जाएगा। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि विभागीय कामकाज में जो कमियां सामने आई हैं, उनका बारीकी से परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधायक द्वारा दिए गए सुझावों को अमल में लाया जाएगा और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।