रमेश गुप्ता भिलाई। चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का तेजी से विस्तार अब जटिल और जोखिम भरी सर्जरी की आवश्यकता को कम कर रहा है। इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण बी.एम. शाह हॉस्पिटल में सामने आया, जहाँ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. आशिष पी. दूधे ने एक महिला मरीज का सफलतापूर्वक बिना सर्जरी इलाज कर उसकी जान बचाई।
3 महीने से गंभीर परेशानी में थी मरीज
53 वर्षीय श्रीमती गीता गुप्ता पिछले तीन महीनों से लगातार उल्टी, भोजन न पचना और तेजी से वजन घटने जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं। कई जगह इलाज कराने के बावजूद जब राहत नहीं मिली, तब उन्होंने बी.एम. शाह हॉस्पिटल में संपर्क किया।
एंडोस्कोपी में सामने आई असली समस्या
जांच के दौरान एंडोस्कोपी करने पर पता चला कि मरीज के एलिमेंटरी कैनाल (पाचन मार्ग) में गंभीर रुकावट (ब्लॉकेज) थी। इस कारण भोजन आगे नहीं बढ़ पा रहा था, जिससे लगातार उल्टी और कुपोषण की स्थिति बन गई थी।
‘CRE बैलून’ तकनीक से बिना ऑपरेशन इलाज
डॉ. आशिष पी. दूधे ने बताया कि पहले ऐसी स्थिति में बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती थी, जो जोखिम भरा होता था। लेकिन इस मामले में डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक ‘CRE Balloon’ तकनीक का उपयोग करते हुए बिना किसी चीरे या टांके के एंडोस्कोपी के जरिए संकुचित हिस्से को लगभग 12 मिमी तक फैलाया (डायलेशन)।
3 दिन में दिखा चमत्कारी सुधार
इलाज के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सुधरी—
उल्टियां पूरी तरह बंद हो गईं
भोजन पाचन सामान्य हो गया
वजन बढ़ना शुरू हो गया
फॉलो-अप में मरीज पूरी तरह स्वस्थ पाई गई
अस्पताल में उपलब्ध विश्वस्तरीय सुविधाएं
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अब संस्थान में आधुनिक एंडोस्कोपी और उन्नत तकनीकों के जरिए मरीजों को बिना बड़े ऑपरेशन के सुरक्षित और त्वरित इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह सफलता न सिर्फ आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धि है, बल्कि उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण भी है, जो जटिल सर्जरी से डरते हैं।
बड़ी खबर | आधुनिक तकनीक ने बचाई जान,बिना सर्जरी के इलाज: बी.एम. शाह हॉस्पिटल में एंडोस्कोपी से मरीज को मिली नई जिंदगी..

30
Mar