जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर खंडपीठ) के भीतर सोमवार को एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घटी, जिसने न केवल न्याय के मंदिर को झकझोर कर रख दिया, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की पोल भी खोल दी। रीवा निवासी एक याचिकाकर्ता सुरक्षा के तमाम घेरों को चकमा देते हुए एक थैली में तीन महीने का ‘मानव भ्रूण’ लेकर सीधे कोर्ट रूम के भीतर पहुंच गया और उसे जज की डाइस पर रख दिया। इस गंभीर चूक के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और तत्काल कार्रवाई करते हुए एक सब-इंस्पेक्टर (SI) समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, रीवा जिले के रहने वाले दयाशंकर पांडे जबलपुर के एक ऑटोमोबाइल शोरूम में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। उनका आरोप है कि काम के दौरान उन्हें शोरूम में करीब 200 करोड़ रुपये के एक बड़े वित्तीय घोटाले का पता चला। जब उन्होंने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन पर और उनके परिवार पर जानलेवा हमले शुरू हो गए। दयाशंकर का दावा है कि 1 मार्च को एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी पत्नी का एक्सीडेंट कराया गया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस हादसे के कारण 8 मार्च को उनकी पत्नी का गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया।
न्याय की गुहार और दर्दनाक प्रदर्शन दयाशंकर का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे तंग आकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को जब मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो दयाशंकर अपने बैग में पॉलिथीन के भीतर तीन महीने का मृत भ्रूण लपेटकर कोर्ट रूम में दाखिल हुए। उन्होंने भरी अदालत में जज के सामने वह भ्रूण रख दिया और भावुक होते हुए कहा, “मेरा बच्चा मर चुका है, अब मेरी बारी है। या तो मुझे न्याय दें या फिर इच्छामृत्यु की अनुमति दें।”
सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल इस घटना ने हाईकोर्ट की सुरक्षा प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि गेट नंबर 6 पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बैग की सघन चेकिंग क्यों नहीं की? कैसे एक व्यक्ति प्रतिबंधित और इतना संवेदनशील सामान लेकर जज के कक्ष तक पहुंचने में सफल रहा? मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने ड्यूटी पर तैनात SI और तीन अन्य जवानों को तत्काल प्रभाव से हटाकर लाइन अटैच कर दिया है।
फिलहाल, सिविल लाइन्स पुलिस और SAF की टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस ने याचिकाकर्ता को समझा-बुझाकर भ्रूण को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है।