रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को लेकर राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) ने बड़ी सफलता हासिल की है। बिलासपुर की विशेष अदालत में एसआईए ने 9 नक्सलियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में खुलासा हुआ है कि ये नक्सली रायपुर के रिहायशी इलाकों में मजदूर बनकर छिपे थे और पेनड्राइव व पत्रों के जरिए जंगलों में बैठे अपने आकाओं तक खुफिया जानकारी पहुंचा रहे थे।
एसआईए की चार्जशीट के अनुसार, नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य आकाश उर्फ पवन रायपुर के चंगोराभाठा इलाके में किराए के मकान में मजदूर बनकर रह रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। उसने संगठन के डीवीसी जग्गू कुरसम और उसकी पत्नी कमला कुरसम को भी रायपुर लाकर इसी मकान में रुकवाया था, जो बाद में शहरी नेटवर्क का मुख्य केंद्र बन गया। जांच के दौरान पुलिस ने इनके पास से 30 तोला सोना और भारी मात्रा में नकदी बरामद की है।
तकनीकी साक्ष्यों और कॉल इंटरसेप्शन के जरिए पुलिस को इस नेटवर्क का सुराग मिला था। आरोपी रायपुर, सिमगा, नवापारा राजिम और बिलासपुर जैसे शहरों में गुप्त बैठकें करते थे और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विशेष कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। गिरधर नाग और संदेव पोडियम जैसे सदस्य जंगल से शहर तक कूरियर का काम करते थे, जो बड़े नेताओं के निर्देश पर विस्फोटक सामग्री और संवेदनशील जानकारियां लेकर आते-जाते थे।
इस मामले की शुरुआत 23 सितंबर 2025 को रायपुर के डीडी नगर थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विवेचना एसआईए को सौंपी गई थी। एसआईए ने रायपुर, बीजापुर और नारायणपुर में दबिश देकर इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया है। गिरफ्तार 9 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और यूएपीए की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।